रेज्यूमे को दें इंप्रेसिव लुक
 

इन दिनों रेज्यूमे भेजने के बाद कैंडिडेट्स की यही ख्वाहिश होती है, अब उन्हें शायद नौकरी के लिए बुलावा आ जाएगा, लेकिन अक्सर ऐसा होता नहीं है। विशेषज्ञों की मानें, तो इसका मुख्य कारण खुद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का मोह और गैर पेशेवर रवैया है। आज जमाना मार्केटिंग का है। बेहतर होगा आप खुद को एक प्रोडक्ट व रेज्यूमे को विज्ञापन की तरह पेश करें। इससे जॉब मिलने में आसानी होती है।

 

लक्ष्य हो साफ

यदि आप एक ही फॉर्मेट के रेज्यूमे को अलग-अलग जॉब के लिए प्रयोग कर रहे हैं, तो इससे बचना चाहिए। इससे नियोक्ता को गलत संदेश जाता है। बेहतर यही होगा कि किसी खास जॉब प्रोफोइल के अनुकूल रेज्यूमे को फॉर्मेट करें। उससे जुड़ी अपनी योग्यता व उपलब्धियों को ही फोकस करें। मतलब साफ है लक्ष्य से भटकाव आपके रेज्यूमे के साथ-साथ आपके पेशेवर छवि पर भी खराब असर डालता है।

 

प्रचलित विधि का प्रयोग

यदि आप रेज्यूमे का सही प्रयोग करना चाहते हैं, तो कोशिश करें कि उसमें ज्यादा प्रयोग न हों। साथ ही, हमेशा प्रचलित विधि से ही रेज्यूमे भेजें। ऑनलाइन रेज्यूमे भेज रहे हैं, तो वह हमेशा टेक्स्ट फॉर्मेट में ही होना चाहिए। अन्यथा, हो सकता है कि किसी अन्य फॉर्मेट में रेज्यूमे पढऩे में न आएं। दरअसल, कुछ ऑनलाइन सिस्टम में बोल्ड इटैलिक्स, बुलेट प्वाइंट्स आदि फॉन्ट को सपोर्ट नहीं करते हैं। इसी तरह, हद से ज्यादा सजावट या फॉन्ट का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।

 

री-चेक करें

यदि आप चाहते हैं कि रेज्यूमे से आपका फस्र्ट इंप्रेशन शानदार हो, तो इसे एम्प्लॉयर के पास भेजने से पहले री-चेक जरूर करें, क्योंकि हो सकता है तमाम विशेषताओं के बावजूद उसमें चंद त्रुटियां रह जाएं और इस चूक की वजह से आप उस जॉब से हाथ धो बैठें। गलतियां होना सामान्य बात है, पर यदि आप रेज्यूमे भेजने से पहले लिंग, वर्तनी आदि से संबंधित अशुद्धियों को ठीक कर लेते हैं, तो यकीनन आप बन सकते हैं एक परफेक्ट कैंडिडेट।

 

न करें सूचनाओं से खिलवाड़

हाल ही में रेज्यूमे में गलत सूचना देने को लेकर कुछ चौंकाने वाली खबरें आई थीं। यह घटना जानी-मानी आईटी कंपनी विप्रो से जुड़ी थी। दरअसल, विप्रो ने अपने कुछ एम्प्लॉइज पर केस इसलिए फाइल किया, क्योंकि उन्होंने अपने रेज्यूमे में गलत सूचनाएं पेश की थीं। कंपनी ने उस एजेंसी को भी नहीं बख्शा, जिसने उन कैंडिडेट्स को जॉब दिलाने में मदद की। लेकिन सच तो यह है कि योग्यता और अनुभव को बढ़ा-चढ़ा पेश करने वाली यह कोई अकेली घटना नहीं है। यह एक प्रवृत्ति बन चुकी है और इस तरह की घटनाएं खूब हो रही हैं।

 

रेज्यूमे हो शानदार

आपका का रेज्यूमें कैसा हो इस विषय पर हमने बात की कॉग्निजंट के वाइस प्रेसिडेंट (एचआर) भास्कर दास से। पेश है बातचीत के कुछ अंश...

 

जॉब की तलाश में रेज्यूमे की क्या भूमिका है?

रेज्यूमे आपके व्यक्तित्व और क्षमताओं की पहली पहचान पेश करता है। इसका उद्देश्य ही होता है कि नियोक्ता कैंडिडेट को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित करे। इस तरह, रेज्यूमे के आधार पर बनने वाला इंप्रेशन साक्षात्कार में भी अहम भूमिका निभाता है। नियोक्ता तथा आवेदनकत्र्ता को एक-दूसरे से क्या अपेक्षाएं हैं, इसकी पृष्ठभूमि काफी हद तक रेज्यूमे ही तय करता है।

 

किस तरह के रेज्यूमे होते हैं बेहतर?

यह जानना जरूरी है कि रेज्यूमे आवेदनकर्ता की आत्मकथा नहीं होता। न ही यह उसके जीवन के छोटे-बड़े उद्देश्यों या आकांक्षाओं का लेखा-जोखा होता है। इसलिए इसमें उपलब्धियों की ऊबाऊ फेहरिस्त नहीं होनी चाहिए। आप नियोक्ता को क्या दे सकते हैं-एक बेहतर रेज्यूमे इसी बात पर फोकस होता है।

 

रेज्यूमे बनाते समय किन बातों का रखना चाहिए विशेष खयाल?

रेज्यूमे संक्षिप्त होना चाहिए। दस-बारह पृष्ठों का पढऩे का समय कंपनियों के एचआर टीमों के पास नहीं होता। अपना उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। किस पद के लिए आवेदन कर रहे हैं, इसे स्पष्टï करें। एक प्रकार का रेज्यूमे सभी तरह के पदों के लिए न भेजें। साथ ही, निश्चित पद का उल्लेख किए बिना भी रेज्यूमे न भेजें। आपकी शैक्षणिक या व्यावसायिक उपलब्धियों तथा आपसे पिछली कंपनियों को क्या लाभ हुआ, यह स्पष्ट शब्दों, आंकड़ों या अन्य प्रमाणों के साथ बयान करें।

  

 

जॉब सर्च का नया टूल

 
यदि हाल के वर्षों पर नजर डालें, तो देखा जा सकता है कि जॉब-सर्च के लिए कैंडिडेट्स की निर्भरता 'जॉब-पोर्टल्स पर लगातार बढ़ती जा रही है। यह ऑनलाइन मीडियम न केवल कॉस्ट इफेक्टिव होता है, बल्कि इससे एम्प्लॉयर्स को भी सही एटिट्यूड वाले कैं डिडेट्स चुनने में मदद मिलती है। लेकिन जिस तरह टेक्नोलॉजी दिन-ब-दिन उन्नत होती जा रही है, उससे जॉब-सीकर्स के सामने जॉब-सर्च के नए-नए विकल्प सामने आने लगे हैं। जॉब सीकर्स चाहें, तो जॉब हंट के लिए जॉब पोर्टल्स के साथ नीचे दिए गए टूल्स का इस्तेमाल भी बखूबी कर सकते हैं : 
 
वेब 2.0
 
आजकल कुछ नए फॉर्मेट के वेबसाइट आ रहे हैं, जहां कैंडिडेट्स के लिए तमाम तरह की सुविधाएं मौजूद होती हैं। इसी तरह की एक जॉब साइट है- www.slideshare.net इस साइट पर आप प्रेजेंटेशन के अलावा, रेज्यूमे आदि भी अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद यू-ट्यूब आदि जैसी साइट आपके वर्क को ऑनलाइन डिस्प्ले कर सकती है। कैंडिडेट्स भी इस रिसोर्स का इस्तेमाल करते हुए एम्प्लॉयर्स से संबंधित सूचनाएं एकत्र कर सकते हंै। वैसे, आजकल देखा गया है कि अधिकतर एम्प्लॉयर्स वेब-फें्रडली होते हैं। वे भी इस तरह की साइट का खूब उपयोग करते हैं। जाहिर है, इन साइट्स की मदद से भी जॉब तलाशने में मदद मिलती है।
 
ब्लॉग्स से जॉब सर्च
 
ब्लॉग अपने विचारों को बया करने का सबसे बेहतरीन माध्यम बन कर उभर रहा है। यही वजह है कि आज चाहे एम्प्लॉई हो या एम्प्लॉयर्स सभी ब्लॉग का खूब उपयोग करने लगे हैं। देखा जाए, तो आज रिक्रूटर्स भी कैंडिडेट्स को रिक्रूट करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जानना और समझना चाहते हैं, जिसे परंपरागत इंटरव्यू के माध्यम से जानना अमूमन आसान नहीं होता है। ऐसे में ब्लॉग कैंडिडेट्स को जानने-समझने का एक अच्छा जरिया बनकर उभरा है। एचआर एक्सपर्टभी मानते हैं कि अब ब्लॉग भी सिलेक्शन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनाता जा रहा है। साथ ही, इस माध्यम से हमें कैंडिडेट्स को एनालिसिस करने के अलावा, उनके एटिट्यूड को समझने में भी काफी मदद मिलती है, जो कि आज के कॉर्पोरेट-वल्र्ड के लिए बेहद जरूरी है।
 
वीडियो रेज्यूमे
 
परंपरागत रेज्यूमे की जगह अब कैंडिडेट वीडियो रेज्यूमे का उपयोग करने लगे हैं। वैसे, रिक्रूटर्स भी वीडियो रेज्यूमे को आम रेज्यूमे पर तरजीह देने लगे हैं। यही वजह है कि अब वीडियो रेज्यूमे को चलन धीरे-धीरे जोर पकडऩे लगा है। एक्सपर्ट भी मानते हैं कि यदि किसी कैंडिडेट्स के पास वीडियो रेज्यूमे है, तो उन्हें आम कैंडिडेट्स की तुलना में अधिक वैल्यू मिलती है, क्योंकि वीडियो रेज्यूमे की मदद से एम्प्लॉयर्स को ऐसे कैंडिडेट्स को चुनने में काफी मदद मिलती है, जिनका प्रेजेंटेशन, क्वालिफिकेशन व अन्य स्किल कंपनी के अनुरूप हो। एक्सपर्ट का मानना है कि जिस तरह से आज प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, उससे वीडियो रेज्यूमे का चलन और तेजी से बढ़ेगा।
 
सोशल नेटवर्किंग
 
भारत में सोशल नेटवर्किंग साइट्स की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। इन साइट्स की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से लोग अब बिजनेस साइट्स की बजाय इन साइट्स की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि अब कंपनियां भी इन सोशल साइट्स की क्षमता की वाकिफ हो चुकी हैं और इसका इस्तेमाल सही कैंडिडेट्स को तलाशने में करने लगी हैं। देखा जाए, तो इन पोर्टल्स में एंट्री फ्री होती है, इसे देखते हुएकंपनियां अधिक से अधिक कैंडिडेट्स के प्रोफाइल को आसानी से खंगाल सकती हैं। यदि सोशल साइट्स की बात करें, तो फेसबुक की तुलना में आरकुट की पॉपुलरिटी आज भी ज्यादा है। यदि आपका प्रोफाइल आकर्षक है, तो इसका फायदा भी आपको मिल सकता है। यानी आने वाले दिनों में एम्प्लॉई के सामने जॉब हंट के और भी विकल्प होंगे।