 तीन मार्च से बोर्ड की परीक्षा शुरू हो रही है। इस परीक्षा की तैयारी बच्चे पूरे साल भर पढ़ाई जरूर करते हैं, लेकिन एग्जाम से पहले वे कोई एक खास स्ट्रेटेजी को फॉलो नहीं करते! यह हमेशा याद रखें कि एग्जाम में श्रेष्ठ प्रदर्शन करना आप ही के हाथ में है, लेकिन ऐसा तभी संभव हो पाएगा, जब आप कॉन्फिडेंट रहेंगे और एक नियत स्ट्रेटेजी को फॉलो करेंगे। ऐसा करके ही आप न केवल एग्जाम पर फोकस्ड रह सकते हैं, बल्कि अंतत: अच्छे अंक हासिल करके मिशन एग्जाम में कामयाब भी हो सकते हैं।
रिविजन की रणनीति
अब तक आपने पिछले वर्ष के प्रश्न-पत्रों और मॉडल पेपर्स का अभ्यास कर ही लिया होगा। अब जब एग्जाम के दिन नजदीक हैं, तो ऐसी स्थिति में बारी है पढ़े गए पाठ के रिविजन की। हां, आप टैक्टफुली रिविजन कर रहे हैं या नहीं, इस बात पर भी ध्यान देना होगा! जब तक आप टैक्टफुली रिविजन नहीं करेंगे, तब तक अच्छे अंक पाने की उम्मीद आप कर ही नहीं सकते।
इसलिए जिन चैप्टर्स को आपने पहले भी पढ़ा है, उन पर और ज्यादा ध्यान दें और जिन्हें पहले कभी टच नहीं किया, उन चैप्टर्स पर भी आप एक सरसरी निगाह जरूर डालें। उल्लेखनीय है कि इस तरह से रिविजन करने से आप न केवल सिलेबस के सभी पक्षों पर बराबर ध्यान दे पाने में सक्षम होंगे, बल्कि अच्छे अंक भी प्राप्त कर सकते हैं।
बनें परफॉर्मर
परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन वही छात्र कर पाते है, जो ऑन-द-स्पॉट परफॉर्म करना जानता है। इसलिए आपने देखा होगा कि कुछ स्टूडेंट्स किसी कारणवश अच्छी तैयारी जरूर नहीं कर पाते हैं, बावजूद इसके वे दूसरे बच्चों से बेहतर अंक हासिल कर लेते हैं। क्यों होता है ऐसा, क्या कभी आपने इस पर गौर किया है? दरअसल, इस तरह के बच्चे न केवल विषय की अच्छी समझ रखते हैं, बल्कि ऑन-द-स्पॉट अच्छे परफॉर्मर भी होते हैं।
यानी उन्हें यह अच्छी तरह पता होता है कि एग्जाम हॉल में पेपर को अटेम्ट करते समय किन-किन बातों को फॉलो करना है और किन बातों को अनदेखा करना है! शायद इसीलिए जब इन्हें अच्छे अंक मिलते हैं, तो लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं और कह उठते हैं-वाह क्या वेल परफॉर्मर हैं!
..ताकि बायोक्लॉक सेट हो सके
इन दिनों चूंकि एग्जाम नजदीक हैं, इसलिए यदि आप अपनी दिनचर्या में थोडी-सी तब्दीली लाएं, तो आपके लिए बेहतर होगा। उदाहरण के तौर पर, आपको इस समय स्टडी के लिए हमेशा दिन के उसी अवधि का चयन करना चाहिए, जिस समयावधि में आपको एग्जाम देना है! क्योंकि जब आप रोजाना
ऐसा करने लगेंगे, तो इसी समय के अनुसार आपकी बॉडी का नेचुरल-क्लॉक यानी बायोक्लॉक सेट हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि हम जैसी आदत डालते हैं हमारी बॉडी भी उसी समय के अनुसार अडेप्ट होती चली जाती है। इसलिए अब जबकि आप बॉडीक्लॉक का राज जान गए हैं, देर रात तक जाग कर पढऩे की आदत से कर लें तौबा और एक नियत समय पर ही सोने-जागने का रखें पूरा-पूरा खयाल। है न कमाल की स्ट्रेटेजी! इसे आजमाएं आपको इसका जरूर लाभ मिलेगा।
ध्यान रखें..
u नया रेफॅरेंस बुक या स्टडी मैटीरियल से रिविजन न करें। इससे आपकी मेमोरी क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है!
u एग्जामिनेशन के दिनों में हार्ड-वर्किग फिजिकल ऐक्टिविटीज से दूर रहना चाहिए।
u पेपर देने के बाद दोस्तों से उन प्रश्नों पर डिस्कस करने की बजाय तुरंत घर जाने से आप न केवल रेस्ट कर सकेंगे, बल्कि अगले पेपर के लिए अच्छी तरह तैयार भी हो पाएंगे।
u समय से पूर्व आंसर-सीट जमा नहीं करें , बल्कि शेष बचे समय का प्रयोग आंसर सीट के रिव्यू और रिचेकिंग में करें।
एग्जामिनेशन हॉल
u पेपर मिलते ही इंस्ट्रक्शन के लिए दिए गए अतिरिक्त समय का करें पूरा उपयोग।
u इधर-उधर नजर डाल कर समय जाया करने की बजाय पेपर पर अपना ध्यान करें कंसन्ट्रेट।
u प्रश्नों को वर्गीकृत कर लें। जैसे, पहले आसान प्रश्नों को, इसके बाद जो आप कम जानते हैं, फिर जिन प्रश्नों से आप बिल्कुल परिचित नहीं हैं। हर प्रश्न के लिए अपनी ओर से डेडलाइन सेट करें और इसका कड़ाई से पालन करें।
u स्पेलिंग मिस्टेक्स न हों, इस बात के लिए रहें सतर्क।
u नो-ब्रेक रूल बनाएं। पानी का बोतल अपने साथ रखें। फिंगर आदि को रिलैक्स करने या किसी टॉपिक पर सोचने में अपना कीमती समय आप व्यर्थ न गंवा दें, इस बात का भी ध्यान रखें।
रिविजन करते समय..
u रिलैक्स रहें और मूड पॉजिटिव रखें।
u आसान सब्जेक्ट को पहले लें, उसके बाद कठिन विषय को।
u गु्रप स्टडी के दौरान लम्बे डिस्कशन से बचें।
u नोट्स में की-कॉन्सेप्ट्स को अंडरलाइन जरूर करें।
u बोरियत फील होते ही उस विषय को तुरंत छोड़ दें।
u ब्रेक के दौरान स्टडी या किसी टॉपिक के बारे में न सोचें।
u अच्छा खाना, अच्छी नींद और एक्सरसाइज में छुपा है अच्छे अंक का राज, यह भी जरूर ध्यान रखें।
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