बॉस की आलोचना बन सकती है आपकी ताकत
सोमवार, 22 फरवरी 2010 16:26

आप एक दक्ष और जिम्मेदार एम्प्लॉई हैं-अपने कॅलीग या बॉस से यह सुनना-भला किसे नहीं भाता! आप भी यह जरूर महसूस करते होंगे कि प्रशंसा के कुछ 'जादुईÓ शब्द आपके उत्साह में गजब का इजाफा कर देते हैं। लेकिन... अफसोस यह है कि यह रोज-रोज नहीं होता! बात तब बिगड़ जाती है, जब आपके काम को 'व्यर्थÓ मानकर काम के साथ-साथ आपको भी (आपके आत्मस मान) कमतर आंका जाता है। दरअसल, इस तरह की 'निगेटिव एनर्जीÓ वर्कप्लेस की आज कॉमन समस्या बन चुकी है। इससे कंपनी के प्रॉडक्टिविटी पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, पॉजिटिव एटीट्यूड और मनो-भावों को समझने की काबिलियत से आलोचना भी बन सकती है ताकत!

 


 

90/10 का सिद्धांत

 
करियर काउंसलर अनिल सेठी के मुताबिक, जो लोग आपके काम की आलोचना करते हैं या जिनकी बातों से आपको ठेस पहुंचती है- उन्हें आप ऐसा करने से रोक नहीं सकते। याद रखिए, जीवन में दस प्रतिशत चीजें हैं, जिन पर हमारा कंट्रोल नहीं हो सकता। यदि आप अपनी आलोचना सुनकर उसका जवाब देने की कोशिश करते हैं, तो स्ट्रेस पालने के साथ-साथ आप अपनी छवि भी खराब कर लेंगे। वहीं यदि शेष नब्बे प्रतिशत चीजों यानी अपने काम को लगातार बेहतर करने की कोशिश करेंगे, तो इसकी बदौलत आप काफी कुछ बदल सकते हैं!


त्वरित प्रतिक्रिया से तौबा


'बॉस की डांट या प्रोजेक्ट को सिरे से खारिज कर देने जैसी बातें एक बारगी परेशान कर देती हैं। यदि आप इसे हैंडिल करने में सक्षम हैं, तो जल्द ही इसका सकारात्मक परिणाम अपने सामने पाएंगे।Ó-ऐसा मानना है आईटी कंपनी हायर के डायरेक्टर (एचआर) संदीप त्यागी का। वे आगे कहते हैं-यह मेरा खुद का अनुभव है। जब हमें बॉस से कड़वी बातें सुनने को मिलती हैं, तो चुपचाप उनकी बात को सुन लेना ही बेहतर मानता हूं। पर बात वहीं खत्म नहीं हो जाती। मौका देखते ही मैं अपनी बात जरूर रख देता हूं। फिर मुझे कहां सुधार की जरूरत है और बॉस को मुझसे किस रूप में अपनी बात कहनी चाहिए-ये चीजें एकदम साफ हो जाती हैं।


आपका फायदा


'बहुत हल्का लग रहा है आपका काम-माफ कीजिएगा पसंद नहीं आयाÓ-इन बातों से तुरंत मोटिवेट होना कठिन है। लेकिन यदि आप अपने काम या प्रोजेक्ट को ठीक से समझते हैं, उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं, तो आप जरूर इन वाक्यों में भी कार्य करने का 'मोटिवेशनÓ ढूंढ सकते हैं। करियर काउंसलर कनन खन्ना के मुताबिक, आलोचना को अपने खिलाफ ही मानने की बजाय इसे एक फीडबैक की तरह लें, तो इसमें आपका ही फायदा है!


मैनेजमेंट फंडा


मैच्योर कंपनी अपने एम्प्लॉई के मोटिवेशन फैक्टर को गंभीरता से लेती है। यही वजह है कि वहां एम्प्लॉई-बॉस रिलेशनशिप संबंधों को लेकर वर्कशॉप्स और ट्रेनिंग आदि का आयोजन होता है। इन्फोगेन के हेड एचआर पंकज शंकर के मुताबिक, हम ऐसे एम्प्लॉइज को ट्रेनिंग देते हैं, जिनका वर्क-एटीट्ïयूड ठीक नहीं होता। इनमें जो बॉस होते हैं, उनके लिए लीडरशिप ट्रेनिंग का आयोजन होता रहता है।
संदीप त्यागी के अनुसार, वर्कप्लेस पर हर तरह के लोग होते हैं। कुछ बॉस फीडबैक कम और अपनी शेखी अधिक बघारते हैं। इससे जाहिर तौर पर वर्कप्लेस की कार्यप्रणाली पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हायर में ऐसे लोगों पर खास नजर रखी जाती है और उनका काउंसलिंग किया जाता है।


प्रॉडक्टिविटी होती है प्रभावित


आलोचना अंतिम रूप से कंपनी की प्रॉडक्टिविटी पर असर डालती है। इस मुद्दे पर पेश हैं जाने-माने मनोचिकित्सक संजय चुग से बातचीत के प्रमुख अंश ...

आलोचना क्यों करते हैं?
खुद से असंतोष या 'मैं परफेक्ट नहीं हूंÓ, जैसे भाव जब हावी हो जाते हैं, तो व्यक्ति क्रिटिकल हो जाता है। आपने यह देखा होगा कि जो लोग मीन-मेख निकालने या गलतियां पकडऩे में माहिर होते हैं, वे खुद से भी कभी खुश नहीं रहते। ऐसे ही बॉस अथवा कर्मचारी छोटी-छोटी गलतियों के प्रति बेहद असहिष्णु होते हैं।


यह कब बन जाता है नुकसानदेह?
आलोचना किसी भी नजरिए से फायदेमंद नहीं हो सकता। जब किसी के आत्मस मान को ताक पर रखकर व्यक्तिगत प्रहार किया जाता है, तो इसे कैसे सकारात्मक कहा जा सकता है? जाहिर है आलोचना मनोबल को तोडऩे का काम करती है। व्यक्ति के कार्य करने के उत्साह पर बुरा असर डालती है। इससे संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और अंतत: उसकी प्रॉडक्टिविटी पर नकारात्मक असर पड़ता है।

आलोचकों से निपटने की रणनीति कैसी होनी चाहिए?
बिल्कुल स्पष्ट रणनीति। याद रखिए, आपके आत्मस मान को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को भी नहीं है! ऐसे में यह आप पर निर्भर है कि आप अपने आत्मस मान की रक्षा कैसे करते हैं? बेहतर होगा वे चाहे आपके बॉस ही क्यों हों, उन्हें 'पर्सनल अटैकÓ का आप मौका ही न दें। ऐसे में किसी भी बात को व्यक्तिगत नहीं लेना है। बात कड़वी लगी है, तो उस पर त्वरित प्रतिक्रिया न दें।

कुछ खास बातें....


u डिफेंसिव होने या सफाई देने से बिगड़ सकती है छवि।

u आपकी बात से किसी को ठेस पहुंची है, तो इसके लिए खेद जरूर प्रकट करें।

u अरे! मैं तो पहली बार इस तरह के काम को देख रहा हूं, जिसे इतने कठिन परिश्रम के बाद अंजाम दिया गया है। निश्चित तौर पर थोड़ी और कोशिश इसे और बेहतर बना सकती है! इस तरह के वाक्य उत्साह का सृजन करने के लिए काफी हैं।

u समस्या नहीं बताएं समाधान।

u सुधार की करें सराहना।