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इन दिनों महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर चल रही है। महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को सेलिब्रेट करने के लिए हर साल 8 मार्च को अंतरराष्टरीय महिला दिवस मनाया जाता है। सबसे पहला महिला दिवस 28 फरवरी, 1909 को मनाया गया था। वैसे, देखा जाए तो आज भारतीय महिला भी किसी मायने में कम नहीं है, चाहे राजनीतिक का क्षेत्र हो या फिर आसमां में उड़ान भरने का। आज तकरीबन हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।
भारत की चार प्रतिष्ठित महिलाओं और उनके काम का जिक्र यहां किया जा रहा है। ये वे नाम हैं जिन्होंने न सिर्फ नई परिभाषएं गढ़ी हैं, बल्कि अंतरराष्टरीय पटल पर अपने-अपने क्षेत्र में देश के नाम को सर्वोपरि भी रखा है।
शहनाज हुसैन: शहनाज हुसैन के पास यूं तो उपलब्धियों और फख्र करने की कई वजहें हैं, लेकिन इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा मुस्लिम देशों के उद्यमियों के लिए आयोजित होने वाली मीटिंग में बुलावा उनके लिए खास बन गया है। आगामी अप्रैल माह में वॉशिंगटन डीसी में आयोजित होने वाली इस मीटिंग में बुलावे को शहनाज बरसों तक काम के प्रति दर्शाए गए समर्पण का सम्मान मानती हैं। वह राष्ट्रपति ओबामा द्वारा दुनियाभर के मुस्लिम देशों के उद्यमियों को साथ लाने के कदम की तारीफ करते हुए कहती हैं, 'महिलाओं ने दुनियाभर के व्यापारिक हल्कों में अपने लिए एक खास मुकाम बनाया है। मैं ओबामा के इस प्रयास की सराहना करूंगी।Ó 70 के दशक में घर के बरामदे से शुरू हुआ शहनाज का सैलून ब्यूटी हर्बल प्रोडक्ट्स के रूप में विस्तार लेकर दुनियाभर में फैल चुका है। उन्हें ब्यूटी की दुनिया और लोगों को खूबसूरत बनाने के काम में मजा आता था और इसी शौक की वह विशेषज्ञ बन गईं। सबसे खूबसूरत लगने वाली भारतीय महिला का नाम अगर उनसे पूछा जाए तो तपाक से जवाब आता है, मधुबाला।
रितु कुमार: भारत की प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनर रितु कुमार को मॉस्को में आयोजित होने वाले फैशन शो में अपने डिजइनर कपड़ों का जलवा बिखेरने का अवसर प्राप्त हुआ है। हालांकि रितु के लिए यह मौका नया नहीं है, वह इससे पहले भी कई बार अपने कपड़ों को विदेशी रैंप पर बिखेरकर तारीफ बटोर चुकी हैं, लेकिन इस बार मौका अलग है, क्योंकि वह मॉस्को की दुल्हन को भारतीय परिधान में जो संवारने वाली हैं। इस आमंत्रण से उत्साहित रितु देशी कपड़ों की छाप में विदेशी मॉडलों को जलवाफरोश करने की जोरदार तैयारियां कर रही हैं। उन्होंने यह बात साझा करने में कोताही नहीं बरती कि मॉस्को की एक मॉडल ही उनकी शो स्टॉपर होगी। रितु की इस लाइन में आर्काइवल गाउन, पारंपरिक कोट, इंडियन कुतूर और ईवनिंग ड्रेसेज प्रमुखता से होंगी। एक और खास बात यह होगी कि सभी मॉडल भारतीय राजघरानों से प्रेरणा लेकर बनाई गई खास घडिय़ां भी पहने नजर आएंगे।
अक्षता मूर्ति: इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की लॉस एंजिलिस में रहने वाली बिटिया अक्षता मूर्ति स्वदेसी हैंडीक्राफ्ट का उपयोग अमेरिका और यूके में शुरू होने वाली अपनी क्लोदिंग लाइन के लिए करने वाली हैं। पिछले वर्ष विवाह बंधन में बंध चुकीं अक्षता अमेरिका को अपना घर बना चुकी हैं। हालाकि भारत के प्रति प्रेम में कोई कमी नहीं आई है। आने वाले महीनों में वह 'अक्षताÓ नाम से अपने लेबल की शुरुआत करेंगी। भविष्य में उनकी इसे घरेलू फंट्र पर भी विस्तार देने की योजना है। पिता के जरिए कॉपरेरेट की दुनिया को करीब से देख चुकीं अक्षता के लिए भारतीय हैंडीक्राफ्ट को विदेशी कपड़ों में ढालना बिल्कुल अलग अनुभव होगा। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढऩे के दौरान उन्हें विदेशों में पारंपरिक डिजाइन के न्यूनतम उपयोग से ही इसका आइडिया आया। वह इसे 'कांप्रिहेंसिव फैशनÓ का नाम देती हैं। खास बात यह है कि उन्हें अपनी मां के ड्रेसिंग सेंस से फैशन डिजाइनिंग की प्रेरणा मिली है।
कृष्णा पाटील: कृष्णा पाटील पिछले वर्ष दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बन गई हैं। लेकिन उनका जोश, जज्बा और हिम्मत 'रुक जाना नहींÓ कहते हुए एक नए मुकाम पर जाने के लिए प्रेरित कर रहा है। कृष्णा बहुत जल्द ही 7 सम्मिट क्वेस्ट शुरू करेंगी, इसमें वह दुनिया के प्रत्येक महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का इरादा रखती हैं। अपने इस अभियान की शुरुआत वह ऑस्ट्रेलिया से करेंगी। कृष्णा का इस रोमांच के प्रति आकषर्ण बचपन में हर साल पहाड़ों पर मनाई जाने वाली छुट्टियों से शुरू हुआ। हालांकि रोमांच के इस सफर में उनकी पढ़ाई और कॉलेज जीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन दुनिया के जिन नजारों को वह देख रही हैं, वह कईयों के लिए असंभव सा ख्वाब हैं। उन्हें इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि उनके अभिभावकों ने उनके शौक की कद्र करते हुए आगे बढ़ाने के लिए राह प्रशस्त की।
महिलाओं का बढ़ता कद: आज भारतीय महिलाएं घर की चारदीवारी से निकल कर आसमां में उड़ान भर रही हैं। देखा जाए, तो कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहले महिलाओं के होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन वहीं आज महिलाएं ट्रेन ड्राइवर, सिक्योरिटी गार्ड, स्टेशन कंट्रोलर, कैब ड्राइवर आदि जैसे काम में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ते हुए 37 वर्षीय सीवी तिलकावथी साउदर्न रेलवे की पहली महिला ड्राइवर बनी हैं। हम कुछ ऐसे ही क्षेत्रों की पड़ताल कर रहे हैं, जहां महिलाओं की चहल-कदमी बढ़ी हैं और वे और अधिक सशक्त हो कर उभरी हैं।
रेलवे में ड्राइविंग
शायद आपको यह जानकार हैरानी होगी कि अत्याधुनिक दिल्ली मेट्रो की ड्राइविंग ग्रुप में आज कुछ लड़कियां भी शामिल हैं, लेकिन कुछ साल पहले तक शायद ही कोई इस बात की कल्पना भी कर सकता था कि कोई महिला ट्रेन की ड्राइविंग सीट पर भी सवार हो सकती है। इससे साफ जाहिर होता है कि महिलाएं अब तरक्की की राह खुद गढऩे लगी हैं। मोर्च पर महिलाएं
अब वह दिन दूर नहीं, जब महिलाएं भी पुरुषों के साथ जंग में मैदान में कदम से कदम मिलाती हुई नजर आएंगी, क्योंकि सेना के तीनों अंगों में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के प्रस्ताव के कारण इनके लिए करियर के नए रास्ते खुले गए हैं। इंडियन आम्र्ड फोर्स में भी परमानेंट कमीशन पर महिलाओं की टीम वर्ष 2013 तक शामिल हो सकती है। पायलट
महिलाओं के कदम अब आसमान में भी बढऩे लगे हैं। कुछ वर्ष पहले तक इस चुनौतीपूर्ण प्रोफेशन को कम ही महिलाएं अपनाती थीं, लेकिन अब एयरलाइंस की बढ़ती संख्या और करियर की संभावनाओं को देखते हुए यह महिलाओं के लिए पसंदीदा क्षेत्र बन कर उभरा हैै। रेस्त्रां
महिलाओं के कदम हर क्षेत्र में बढ़ हैं, इसमें रेस्त्रां का क्षेत्र भी शामिल है। इन दिनों महिलाएं बड़े पैमाने पर इस कारोबारों में न केवल उतर रही हैं, बल्कि इसमें सफल भी हो रही है। मिसाइल प्रोजेक्ट
टेसी थॉमस पहली भारतीय महिला हैं, जो देश की मिसाइल प्रोजेक्ट (डिआरडिओ में) को हैंडिल कर रही हैं। दरअसल, टेसी उन भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो देश के मिसाइल प्रोजेक्ट में काम करने की इच्छा तो रखती हैं। टेसी अग्नी-2 मिसाइल प्रोजेक्ट को हेड रह रही हैं। मजे की बात यह है कि टेसी के पुत्र का नाम तेजस है और लाइट कॉम्बेट एयरक्रॉफ्ट का नाम भी यही है। इतना ही नहीं, कई भारतीय मूल की महिलाएं भी नासा के अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी हुई हैं। संभावनाओं वाले क्षेत्र
कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जिनमें इन दिनों महिलाएं अपनी संभावनाओं के झंडे गाड़ रही हैं...
l टीचिंग
l एयर होस्टेज
l एडवटाइंजिंग
l एडवोकेट
l फैशन डिजाइनर
l जर्नलिज्म
l बिजनेस एग्जीक्यूटिव
l ब्यूटीशियन
l मेडिकल
l पब्लिक रिलेशन
l सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग
l बीपीओ
टॉप बिजनेस वूमन किरण मजुमदार शॉ (भारत की धनी महिलाओं में शुमार और बायोकॉन लि. की चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं)
नैना लाल किदवई (एचएसबीसी बैंक इंडिया की भारतीय प्रमुख। किदवई पहली भारतीय महिला है, जिन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से ग्रेजुएट किया है।) चंदा कोचर (आईसीआईसीआई बैंक की मैनजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं। )
उषा थरोट (दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमी से इकोनॉमी में मास्टर डिग्री हासिल कर चुकी थरोट ने वर्ष 1972 में रिजर्व बैंक को ज्वाइन किया। इसके बाद वे रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के पद पर पहुंच चुकी हैं।)
ज्योति नाइक (नाइक श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की प्रेसिडेंट हैं। इस उद्योग के मैन्युफैक्चरिंग कार्यों में महिलाएं ही हैं।)
सुलाजा फिलाडिआ मोटवानी (मोटवानी काइनेटिक इंजीनियरिंग लि. की ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और काइनेटिक फाइनैंस की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं)
शहनाज हुसैन (शहनाज हुसैन हर्बल्स की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं। हुसैन को भारत की सबसे सफल महिला एंटरप्रेन्योर में शुमार किया जाता है।)
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