दूसरी तिमाही में खूब मिलेगी नौकरी : मैनपावर
मंगलवार, 09 मार्च 2010 17:23

भारत के वित्तीय और रीयल्टी सहित लगभग सभी क्षेत्रों में अगले तीन माह की अवधि के दौरान नौकरियों की बहार रहेगी। वैश्विक स्टाफिंग सेवा फर्म मैनपावर के मुताबिक नियुक्तियों के मामले में दुनिया में भारतीय कंपनियों का रुख सबसे ज्यादा आशावादी है। मैनपावर के तिमाही रोजगार परिदृश्य सर्वेक्षण के अनुसार, अप्रैल-जून की अवधि के लिए इससे पिछली तिमाही की तुलना में भारतीय कंपनियों के नियुक्ति परिदृश्य में चार प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।

 सर्वेक्षण में शामिल 36 देशों और क्षेत्रों में से भारतीय कंपनियों का शुद्ध रोजगार परिदृश्य सबसे ज्यादा 39 प्रतिशत का रहा है। मैनपावर इंडिया के प्रबंध निदेशक संजय पंडित के मुताबिक, मजबूत घरेलू वृद्धि की वजह से भारतीय कंपनियों का रुख आशावाद का रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए उद्योग जगत के सभी क्षेत्रों में अवसरों में सुधार हो रहा है। भारत के सेवा एवं वित्त, बीमा एवं रीयल एस्टेट क्षेत्रों में आगामी महीनों में नियुक्तियों में तेजी दिखाई देगी। वैश्विक स्तर पर 2008 की तीसरी तिमाही के बाद भारत में नियुक्तियों का परिदृश्य सबसे मजबूत दिखाई दे रहा है।


सर्वेक्षण में कहा गया है कि नौकरी तलाश रहे लोगों को सेवा उद्योग, वित्त, बीमा, रीयल्टी, विनिर्माण और खनन तथा निर्माण क्षेत्र में अप्रैल-जून की तिमाही में काफी सकारात्मक माहौल मिलेगा। जापान को छोड़कर एशिया प्रशांत क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं अच्छी बनी हुई हैं। वहीं अमेरिकी क्षेत्र में नियुक्ति की संभावनाओं में धीमी गति से सुधार हो रहा है।


मैनपावर के मुताबिक, नियुक्तियों को लेकर भारत, ब्राजील और ताइवान की कंपनियों की रुख सबसे मजबूत है, वहीं अमेरिका में स्थिति कमोबेश तीन माह पहले वाली बनी हुई है। हालांकि, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। पंडित ने भारत के बारे में कहा कि भारतीय कंपनियों का भरोसा बढ़ने की वजह बेहतर औद्योगिक उत्पादन, उपभोक्ता सामान की मांग में निरंतर इजाफा, वाहन क्षेत्र तथा आईटी और आईटीईएस क्षेत्रों में सुधार है।
वित्तीय, बीमा तथा रीयल एस्टेट क्षेत्र की कंपनियों के रोजगार परिदृश्य में पिछली तिमाही की तुलना में चार प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।

आईटी़-बीपीओ में मिला सर्वाधिक रोजगार
देश में पिछली तिमाही में संगठित क्षेत्र में 90 प्रतिशत रोजगार सीधे नियोक्ता द्वारा दिए गए, जबकि 10 प्रतिशत रोजगार अनुबंध के आधार पर थे। एक नवीनतम सरकारी सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई है। श्रम ब्यूरो की ओर से अक्टूबऱ-दिसंबर तिमाही के दौरान किए गए इस सर्वेक्षण का निष्कर्ष है कि इस दौरान प्रत्यक्ष रोजगार देने वाले नियोक्ताओं में सबसे बड़ा हिस्सा आईटी सूचना प्रौद्योगिकी तथा बीपीओ क्षेत्र का रहा। समीक्षाधीन तिमाही में जुलाई़-सितंबर तिमाही के मुकाबले 6.38 लाख नौकरियां बढ़ीं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार आने का संकेत मिलता है। इन नौकरियों में प्रत्यक्ष वर्ग में 5.79 लाख नौकरियां बढ़ीं, जबकि अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में महज 0.59 लाख की वद्धि दर्ज की गई।


प्रत्यक्ष रोजगार के तहत वे स्थायी एवं अस्थायी कर्मचारी शामिल हैं जिनकी नियुक्ति सीधे नियोक्ता द्वारा की गई। वहीं दूसरी ओर, ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों में वे कर्मचारी आते हैं जिन्हें एक ठेकेदार द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए काम पर रखा गया।


रपट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के आठ चुनिंदा क्षेत्रों में कराए गए इस सर्वेक्षण में पाया गया कि प्रत्यक्ष रोजगार वर्ग में 5.79 लाख नौकरियों का सृजन हुआ जिसमे आईटी़ और बीपीओ क्षेत्र में 5.67 लाख नौकरियां पैदा हुईं।


पीएसयू के प्रति महिलाओं में क्रेज
बीपीओ कंपनियों के दाम के मुकाबले महिलाओं को पीएसयू का काम ज्यादा खुशी देता है। उद्योग चैंबर एसोचैम के सर्वे से यह निष्कर्ष सामने आया है। सर्वे के मुताबिक बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग (बीपीओ) जैसी निजी कंपनियों में कार्यरत महिलाएं पगार तो ज्यादा पाती हैं, पर काम से संतुष्टि के मामले में पीछे रह जाती हैं। उनके मुकाबले पीएसयू यानी सरकारी कंपनियों में काम करने वाली महिलाएं कम वेतन में भी अधिक संतुष्ट हैं। बीपीओ में कालसेंटर व विदेशी कंपनियों के काम देश में ही करने वाली आईटी फर्मे वगैरह शामिल हैं।


एसोचैम ने यह सर्वेक्षण 773 महिला कर्मचारियों पर किया था। इसमें पीएसयू की महिला कर्मियों में संतुष्टि का स्तर 10 के पैमाने पर 7 नापा गया। वहीं बीपीओ जैसी निजी फर्मो में कार्यरत महिलाओं में संतुष्टि का यह स्तर महज 4 रहा। सर्वे में शामिल ज्यादातर महिलाओं का कहना था कि वे सरकारी कंपनियों में काम करना चाहेंगी। काम के मामले में उन्होंने बैंकिंग, बिजली व पेट्रोलियम जैसी पीएसयू को प्राथमिकता दी।


महिलाओं के मुताबिक, इन क्षेत्रों में काम की प्रकृति संतोषजनक है। साथ ही नौकरी की सुरक्षा के अलावा काम के घंटे भी सुविधाजनक हैं। वहीं दूसरी ओर बीपीओ व केपीओ (नालेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग) कंपनियों की महिलाकर्मियों ने व्यक्तित्व विकास की संभावनाओं में कमी महसूस की, क्योंकि निर्णय करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका काफी कम होती है। साथ ही काम के घंटों में लचीलापन नहीं होता। इतना ही नहीं उन पर लक्ष्य हासिल करने का भी भारी दबाव रहता है।


महिलाएं पुरुष से कम कमाती हैं


महिलाएं अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के साथ कमाती भी हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार संघ की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं पुरुषों की तुलना में तीन गुना कम कमाती हैं। साथ ही महिलाओं को करियर में आने वाली बाधाओं का सामना भी ज्यादा करना पड़ता है। इंटरनेशनल ट्रेड यूनियन कनफेडरेशन द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि घर की जिम्मेदारी महिलाओं के करियर को चोट पहुंचाती है। रिपोर्ट के मुताबिक जो महिलाएं अपने बच्चों के साथ रहती हैं वह लगभग 68 फीसदी कमाती है। जबकि जिन महिलाओं के बच्चे नहीं होते वे 74 फीसदी कमाती हैं।


रिपोर्ट के प्रकाशन के मौके पर आइटीयूसीस वुमेन कमेटी की चैयर परसन डायना होलैंड ने महिला दिवस पर कहा कि महिलाएं बच्चे पालने के साथ जॉब भी करती हैं, जो उनके लिए पार्ट टाइम काम की तरह है। करियर बनाने के साथ-साथ परिवार को चलाना एक मुश्किल काम है। महिलाओं पर परिवार की जिम्मेदारी है जिसकी वजह से वह पुरुषों की तुलना में कम कमाती हैं। अध्ययन में पाया गया है कि महिलाएं जो बच्चों के साथ काम करती हैं उनका प्रमोशन नहीं होता। कंपनी किसी भी महिलाकर्मी को रखने से पहले उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट भी कराती है जो गैर कानूनी तरीका है। अध्ययन में यह भी पाया गया जो महिलाएं गांव में काम करती हैं और कृषि क्षेत्र में काम करती हैं उनके साथ यह परेसानी ज्यादा रहती है।