Study Destination
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| आईएएस प्रिलिम्स की जगह ऐप्टिट्यूड टेस्ट |
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कॉमन मेडिकल एंट्रेंस अगले साल से मेडिकल कोर्स के तमाम एंट्रेस टेस्ट की खातिर अलग-अलग शहर जाने की जहमत अगले साल से नहीं उठानी होगी। राज्यों के अपने एंट्रेंस टेस्ट और प्राइवेट टेस्ट भी खत्म हो जाएंगे।
रैगिंग फ्री कैंपस डीयू में 21 जुलाई से नया सेशन शुरू होने वाला है। यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेजों और डिपार्टमेंट्स से कहा है कि रैगिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी और राघवन कमिटी के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को आगाह किया है कि रैगिंग की छोटी से छोटी घटना को गंभीरता से लिया जाए और एक्शन लेने में देरी न हो। रैगिंग को लेकर यूनिवर्सिटी आरोपी के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरत सकती।
DTU में काउंसलिंग की बारी दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बीटेक कोर्सेज की काउंसलिंग दिल्ली टेक्नॉलजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) पूर्व में बुधवार से शुरू हो रही है। यूनिवर्सिटी बवाना स्थित कैंपस में काउंसलिंग होगी। बीटेक की 910 सीटों के लिए इस बार एआईईईई रैंक के बेस पर एडमिशन होगा। स्टूडेंट्स को अपने साथ तीन पासपोर्ट साइज फोटो, एआईईईई स्कोर कार्ड, एडमिट कार्ड और ओरिजिनल डॉक्युमेंट्स लाने होंगे। साथ ही, डॉक्युमेंट की अटेस्टेड फोटोकॉपी भी साथ लानी होगी। इन कोर्सेज के लिए 8500 स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया है।
मिशन ऐडमिशन : सेकंड लिस्ट में चांस डीयू की फर्स्ट कट ऑफ को लेकर स्टूडेंट्स पसोपेश में हैं। वजह है हाई कट ऑफ। हालांकि इसे लेकर स्टूडेंट्स को निराश होने की जरूरत नहीं है। जिन स्टूडेंट्स का नाम फर्स्ट लिस्ट में नहीं है, वह दूसरी कट ऑफ का इंतजार करें। कॉलेजों के प्रिंसिपलों का भी यह कहना है कि इस बार टीचर्स की एडमिशन प्रोसेस में भागीदारी न होने से ऐप्लीकेशन डाटा का ठीक से विश्लेषण नहीं हो पाया और कॉलेजों को कट ऑफ तैयार करने में अंदाजे का सहारा लेना पड़ा है। यही कारण है कि ज्यादातर कॉलेजों ने अपनी पहली लिस्ट में एक से दो पर्सेंट की बढ़ोतरी कर यूनिवर्सिटी को भेज दी है। कॉलेज यह मान रहे हैं कि इस बार की फाइनल कट ऑफ पिछले साल से कम ही रहेगी।
DU की पहली कट ऑफ लिस्ट जारी दिल्ली यूनिवर्सिटी में ऐडमिशन की फर्स्ट कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी गई है। इसमें हाई स्कोर करने वाले स्टूडेंट्स को ज्यादा चांस दिया गया है। नॉर्थ कैंपस के कॉलेजों में जहां कट ऑफ का ग्राफ 1 से 2 पर्सेंट तक बढ़ा है, वहीं आउट ऑफ कैंपस कॉलेजों ने कॉमर्स के पॉपुलर कोर्सेज में 1 से 5 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी की है। बीकॉम ऑनर्स व इकनॉमिक्स ऑनर्स का ग्राफ भी हाई है। पहले लिस्ट के बेस पर कैंपस के किसी भी कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स कोर्स में 94 पर्सेंट से कम पर ऐडमिशन नहीं हो सकेगा। इस बार सबसे खास बात यह रही कि किरोड़ीमल कॉलेज (केएमसी) ने बीकॉम ऑनर्स की कट ऑफ श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) से भी हाई रख दी और इस कोर्स की सबसे हाई लिस्ट इसी कॉलेज की है। लेडी श्रीराम कॉलेज की बीकॉम ऑनर्स और इको ऑनर्स की कट ऑफ में 0.25 की गिरावट भी आई है , यहां पर बीकॉम ऑनर्स में 95 और इको ऑनर्स में 95.25 पर्सेंट लाने वालों को एडमिशन मिलेगा। इंग्लिश ऑनर्स कोर्स भी हॉट फेवरिट है जबकि साइंस में कंप्यूटर साइंस ऑनर्स , फिजिक्स ऑनर्स और केमिस्ट्री ऑनर्स की डिमांड है। कैंपस के दौलतराम कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स में दो पर्सेंट का इजाफा हुआ है। एसआरसीसी में इकनॉमिक्स ऑनर्स की कट ऑफ में 0.25 का इजाफा हुआ है और इस कोर्स में 93.75-96.75 पर्सेंट तक लाने वालों को ऐडमिशन मिलेगा। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ . पी . सी . जैन ने बताया कि ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को इकनॉमिक्स ऑनर्स में 93.75 , साइंस स्टूडेंट्स को 94.75 और कॉमर्स स्टूडेंट्स को 96.75 पर्सेंट पर एडमिशन मिलेगा। आउट ऑफ कैंपस कॉलेजों में एसपीएम ने बीकॉम ऑनर्स की कट ऑफ को सीधे 85 से 90 तक ला दिया है जबकि जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज ने इकनॉमिक्स ऑनर्स की कट ऑफ में दो पर्सेंट का इजाफा कर 89 तक लाया है। केएमसी ने बीकॉम ऑनर्स की कट ऑफ में 1.25 का इजाफा करते हुए 95.50 तय की है, जबकि एसआरसीसी में बीकॉम ऑनर्स में 95.25-98.75 तक मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स को ही ऐडमिशन मिलेगा। एसआरसीसी ने बीकॉम ऑनर्स की कट ऑफ में कोई बदलाव नहीं किया है। यानि जिन स्टूडेंट्स ने कॉमर्स बैकग्राउंड से मैथ्स के साथ 12 वीं की हैं, उन्हें 95.25 यानि कैटिगरी ए में ऐडमिशन मिल जाएगा। जिन स्टूडेंट्स ने न मैथ्स, न इकनॉमिक्स, न अकाउंट पढ़ा है, उन स्टूडेंट्स को लास्ट कैटिगरी में रखा गया है और उन्हें 98.75 में ऐडमिशन मिलेगा। ।
डिप्टी डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ.जी.एस. टुटेजा का कहना है कि अगर लिस्ट में नाम आ गया है, तो एडमिशन जरूर ले लेना चाहिए। जो स्टूडेंट फर्स्ट लिस्ट में एडमिशन नहीं लेगा, उस कॉलेज में बाद में एडमिशन नहीं मिल पाएगा। उनका कहना है कि अगर बाद में किसी लिस्ट में दूसरे कॉलेज या कोर्स में नाम आ जाता है, तो फिर एडमिशन कैंसल कराकर दूसरी जगह एडमिशन लिया जा सकता है। इसलिए स्टूडेंट्स को कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए। स्टूडेंट्स को कॉलेजों के एडमिशन क्राइटेरिया के बारे में जरूर पता कर लेना चाहिए, ताकि एडमिशन वाले दिन कोई परेशानी न हो। सेकंड कट ऑफ लिस्ट 26 जून को आएगी। सेंट स्टीफंस की कट ऑफ लो
दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज ने फर्स्ट कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट के आधार पर स्टूडेंट्स का इंटरव्यू होगा। लगातार बढ़ रहे कट ऑफ के ग्राफ पर इस बार ब्रेक लगाने की कोशिश की गई है। कॉलेज ने कट ऑफ में 1 से 3 पर्सेंट तक की गिरावट की है। अधिकतर कोर्सेज की कट ऑफ में कमी आई है।
कॉलेज चाहता है कि कॉमर्स बैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्स की संख्या अधिक न हो, इसलिए उनके लिए कट ऑफ सबसे हाई रखी जाती है। कॉलेज में कुल 420 सीट हैं, जिसके लिए 22,000 ऐप्लीकेशन आई थीं। और हर कोर्स के लिए इंटरव्यू का अलग-अलग रेश्यो तय किया गया है। फिजिक्स ऑनर्स में 1:5, केमिस्ट्री ऑनर्स और बीएससी प्रोग्राम में 1:5, इकोनॉमिक्स में 1:5 रेश्यो तय किया गया है। इस रेश्यो का मतलब है कि एक सीट के लिए पांच स्टूडेंट्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। कॉलेज ने इस बार नया फॉर्म्युला लागू किया है, जिसके मुताबिक जनरल और रिजर्व कैटिगरी (क्रिश्चियन और एससी-एसटी) की कट ऑफ में 15 पर्सेंट से अधिक का अंतर नहीं रहेगा। इसी के कारण इस बार कट ऑफ में कमी की गई है। हालांकि साइंस स्टूडेंट्स के लिए फिलॉसफी ऑनर्स में कट ऑफ में 4 पर्सेंट की बढ़ोतरी की गई है। सबसे पॉपुलर कोर्स इकोनॉमिक्स ऑनर्स में साइंस स्टूडेंट्स के लिए कट ऑफ 95.25 रखी गई है। जबकि इस कोर्स में कॉमर्स के स्टूडेंट्स की कट ऑफ 97 और आर्ट स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए कट ऑफ 95 है।
मैथ्स ऑनर्स में साइंस स्टूडेंट्स की कट ऑफ एक पर्सेंट की गिरावट के साथ 93.5 है, जबकि आर्ट स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए कट ऑफ तीन पर्सेंट बढ़कर 85 हो गई है, वहीं कॉमर्स स्ट्रीम की कट ऑफ इस बार भी 94 है। साइंस स्टूडेंट्स के लिए इंग्लिश ऑनर्स कोर्स की कट ऑफ डेढ़ पर्सेंट की कमी के साथ 94.50 रही है, वहीं कॉमर्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को इंग्लिश ऑनर्स में 97 पर्सेंट और आर्ट स्ट्रीम के स्टूडेंट्स को 92.50 पर्सेंट पर एडमिशन मिलेगा। हिस्ट्री ऑनर्स में साइंस के स्टूडेंट्स को पिछले साल की तरह ही 95 पर्सेंट पर एडमिशन मिलेगा, जबकि कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए कट ऑफ में 2 पर्सेंट व आर्ट के लिए 3 पर्सेंट की गिरावट की गई है।
पूरे देश में यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स हैं और स्टूडेंट्स को रीजनल लैंग्वेज में पढ़ने का मौका भी दिया जाना चाहिए और इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक शुरुआत में तो स्टूडेंट्स को हिंदी या इंग्लिश में ही क्वेश्चन पेपर मिलेगा लेकिन बाद में रीजनल लैंग्वेज में भी क्वेश्चन पेपर जारी किए जाएंगे। इस बारे में एक्सरसाइज शुरू भी हो गई है। इग्नू में साल में दो बार एग्जाम होता है। पहली जून से 30 जून और पहली दिसंबर से 31 दिसंबर तक एग्जाम कंडक्ट किए जाते हैं।
एमएमआई की कटऑफ 73.5 जबकि एसएमई में 70 पर्सेंट वाले को एडमिशन मिल पाया था। टूरिज्म की लास्ट कटऑफ 72.5 पर्सेंट गई थी। एमएम कोर्स में 70 पर्सेंट वाले एडमिशन ले पाए थे। कॉलेज के मुताबिक, इस बार सीटें बढ़ने के कारण ऐप्लीकेशन का नंबर भी बढ़ा है और कट ऑफ में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस कॉलेज में स्टूडेंट्स वोकेशनल स्टडीज में डिग्री कोर्स करते हैं जबकि बाकी कॉलेजों में बीए प्रोग्राम में स्टूडेंट्स वोकेशनल सब्जेक्ट ले सकते हैं। ग्रेजुएशन लेवल पर ये कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स की अलग -अलग कंपनियों में प्लेसमेंट हो जाती है। डीयू में पॉपुलर जर्नलिज्म कोर्स डीयू के जर्नलिज्म कोर्स का स्टूडेंट्स में काफी क्रेज है। यूनिवर्सिटी में हिंदी और इंग्लिश दोनों लैंग्वेज में डिग्री कोर्स करने का मौका स्टूडेंट्स को मिलता है। दोनों कोर्सेज में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस भी चल रहा है। जर्नलिज्म के डिग्री कोर्स में एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड फॉर्म से रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। इसके लिए अलग से अप्लाई करना होगा।
DTU में ऐडमिशन प्रोसेस शुरू दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) में ऐडमिशन की रेस शुरू हो गई है। यूनिवर्सिटी में बीटेक के 14 फुल टाइम कोर्सेज में ऐडमिशन के लिए 21 जून तक अप्लाई किया जा सकता है। बीटेक में 910 सीटें हैं। सीबीएसई के ऑल इंडिया इंजिनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन (एआईईईई) में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स को ही डीटीयू के बीटेक फुल टाइम कोर्सेज में ऐडमिशन का मौका मिल सकेगा। एआईईईई का रिजल्ट जल्द आने वाला है और इस टेस्ट में रैंक के आधार पर डीटीयू में ऐडमिशन हो सकेगा। यूनिवर्सिटी में 85 पर्सेंट सीटें दिल्ली के स्टूडेंट्स के लिए होती हैं, जबकि 15 पर्सेंट सीटों पर आउटसाइड दिल्ली कैटिगरी के स्टूडेंट्स को ऐडमिशन मिल पाता है।
पहले डीटीयू का नाम दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग था और यह डीयू से जुड़ा था। डीयू ही एंट्रेंस टेस्ट कंडक्ट करता था लेकिन यूनिवर्सिटी बनने के बाद यह तय किया गया है कि एआईईईई के जरिए ही सीटें भरी जाएंगी। डीटीयू में वही स्टूडेंट्स अप्लाई कर सकते हैं, जिनके 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स का अग्रीगेट 60 पर्सेंट होगा। सीनियर स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन लेवल पर इंग्लिश में पास होना भी जरूरी शर्त है। स्टूडेंट्स को फॉर्म यूनिवर्सिटी काउंटर से मिलेंगे। डीटीयू के रजिस्ट्रार के नाम से 750 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करवाकर फॉर्म लिया जा सकता है। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट www.dce.edu से भी फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता है और डिमांड ड्राफ्ट के साथ जमा करवाया जा सकता है।
कोझीकोड में तीस फीसदी से ज्यादा छात्राएं कोझीकोड में स्थित आईआईएम संस्थान के नाम एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। यह देश का पहला ऐसा आईआईएम है, जिसने अपने यहां तीस फीसदी से ज्यादा छात्राओं को दाखिला दिया है। इस संस्थान में दाखिला पाने वाले 300 छात्रों में से 100 लड़कियां हैं। इन छात्राओं को बगैर आरक्षण के प्रवेश दिया गया है। आईआईएम-कोझीकोड के निदेशक देवाशीष चटर्जी ने कहा कि संस्थान के लिए बहुत गौरव की बात है, जो छात्राओं को दाखिला देने के मामले में यह पहले नंबर पर है।
चटर्जी के मुताबिक, इस संस्थान में छात्राओं को ज्यादा से ज्यादा दाखिला देने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की इस टिप्पणी ने प्रेरित किया कि आईआईएम में छात्रों के मुकाबले छात्राओं की संख्या बहुत कम है। गौरतलब है कि इस श्रेणी में देश के सबसे पुराने
आईआईएम में दाखिले के लिए होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) में हर साल तकरीबन 25 फीसदी छात्राएं अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं, जिनमें से महज 8 से 10 फीसदी अंतिम राउंड तक पहुंच पाती हैं। चटर्जी ने आगे कहा कि यह पहली बार नहीं है जब आईआईएम कोझीकोड ने नई मिसाल कायम की है। इससे पहले यह संस्थान अपने यहां ओबीसी कोटा लागू करने के मामले में भी पहले नंबर पर रहा था। यह देश का इकलौता आईआईएम है, जो गरीब व अनु. जाति/अनु. जनजाति के छात्रों को कैट एग्जाम के लिए प्रशिक्षण की सुविधा मुहैया कराता है।
स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर बनी स्थायी संसदीय समिति देश के एम्स जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों से शिक्षा प्राप्त स्नातकों को अपने संस्थान/अस्पताल में एक निर्धारित समय तक सेवाएं देना अनिवार्य बनाने की दिशा में काम कर ही है। अमर सिंह की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी ने इस बात पर दुख जताया कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़कर निकले ज्यादातर छात्र अपना कॅरियर बनाने के लिए विदेश चले जाते हैं।
कमेटी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को इन मेडिकल छात्रों से ऐसा कोई बांड भरवाने का भी सुझाव दिया है, जिससे उनके लिए अपने कॉलेज या संस्थान अथवा अन्य सरकारी अस्पतालों या संस्थानों में निर्धारित समय तक अपनी सेवाएं देना अनिवार्य किया जा सके। कमेटी ने बताया कि वर्ष 1989 से 2000 के दौरान एम्स से 428 छात्र पढ़कर निकले, जिनमें से 233 यानी 54 फीसदी सुनहरे कॅरियर के मोह में विदेश पलायन कर गए। इसी तरह एम्स के अस्पताल प्रशासन द्वारा किए गए एक अध्ययन के तहत यह पाया गया कि एम्स में एक एमबीबीएस डॉक्टर तैयार करने में तकरीबन 1 करोड़ 70 लाख रुपये खर्च होता है। यह तब है जबकि एम्स में मेडिसिन का कोर्स करने वाले छात्र को सालाना फीस के रूप में महज 850 रुपये देने पड़ते हैं, जिसमें शिक्षण व छात्रावास शुल्क भी हैं।
गरीब छात्रों को चार फीसदी पर शिक्षा ऋण केंद्र सरकार कमजोर तबके के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए चार फीसदी की दर से ऋण उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इस संबंध में मानव संसाधन मंत्रालय और योजना आयोग के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। संप्रग सरकार की एक प्रमुख उपलब्धियों में से एक हो सकती है। मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है। हमने इस विचार पर योजना आयोग के साथ चर्चा की है और उनकी ओर से अच्छी प्रतिक्रिया आई है। उल्लेखनीय है कि यह ऋण बैंकों द्वारा दिया जाएगा, जबकि एक प्रस्तावित वित्तीय संस्था बैंकों के घाटे को बराबर करने के लिए वित्त पोषण करेगी। अब प्रस्तावित राष्ट्रीय उच्च शिक्षा वित्त निगम (एनएचईएफसी) पर भी काम किया जाएगा। सिब्बल ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही क्रियान्वित हो जाएगा। इस योजना में एक अन्य तथ्य भी जोड़ा गया है, जिसमें दूसरे वर्ग के छात्रों को सात प्रतिशत की ब्याज दर से ऋण मुहैया कराए जाएंगे। इस श्रेणी में ऋण की सीमा पर लगाम लगाई जाएगी। वहीं लंबी राशि के लिए नौ प्रतिशत की ब्याज दर से भी छात्रों को ऋण मुहैया कराने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक एनएचईएफसी छात्रों के साथ-साथ उच्च शैक्षणिक संस्थानों को भी आधारभूत संरचना के विकास के लिए ऋण मुहैया कराएगा।
आंकड़े दर्शाते हैं कि 2008 और 2009 में आईआईटी की परीक्षा में हिंदी माध्यम से परीक्षा में क्रमश: 1.27 प्रतिशत और 1.84 प्रतिशत सफल हुए थे। इसके विपरीत अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा देने वाले छात्र क्रमश : 98.73 प्रतिशत और 98.16 प्रतिशत सफल रहे हैं। आईआईटी की परीक्षा में 2008 में 13.08 प्रतिशत परीक्षार्थी बैठे थे जबकि 2009 की परीक्षा में 12.86 प्रतिशत परीक्षार्थी बैठे थे वहीं अंग्रेजी माध्यम में 86.92 प्रतिशत और 87.14 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी।
दिल्ली हाईकोर्ट में आईआईटी में हुई गलतियों के मामले पर याचिका दायर करने वाले सत्या फाउंडेंशन के चेतन उपाध्याय कहते हैं कि इस बार की आईआइटी की परीक्षा में हुई गलतियों ने तो हिंदी माध्यम वाले परीक्षार्थियों का बेड़ागर्क कर दिया है। ऐसे में पेपर दोबारा कराने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता। आईआईटी ने जो समाधान प्रस्तुत किया है वो बेहतर नहीं है। गौरतलब है कि आईआईटी-जेईई के प्रश्नपत्र में हुई गलतियों को सुधारने के लिए नए पैमाने की घोषणा कर दी है। वहीं शिक्षाविद् मानते हैं कि आईआईटी की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान इसे अंग्रेजी में कराते हैं ऐसे में छात्र इस माध्यम में ही पेपर देते हैं और सफल होते हैं।
यह इग्नू और इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास (आईआरसीसी) मिलकर ये कोर्स कराता है। इस प्रोग्राम को करने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 12वीं है और प्रोग्राम फीस दो हजार रुपए है। सर्टिफिकेट इन एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग छह माह का प्रोग्राम है। इसको करने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 12वीं है और फीस दो हजार रुपए है। सर्टिफिकेट इन कोऑपरेशन, कोऑपरेटिव लॉ और बिजनेस लॉ छह माह का प्रोग्राम है। इस प्रोग्राम को करने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 12वीं है और प्रोग्राम फीस छह हजार है। इन के आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तारीख 30 जून है। यह प्रोग्राम 15 जुलाई से शुरू होंगे।
स्टीफंस का ऐडमिशन प्रोसेस 25 से शुरू डीयू के सेंट स्टीफंस कॉलेज ने इस बार भी अपना अलग ऐडमिशन शेडयूल जारी किया है। जहां यूनिवर्सिटी ने 28 मई से प्रोसेस शुरू करने की घोषणा की है, वहीं सेंट स्टीफंस कॉलेज 25 मई से फॉर्म की बिक्री शुरू करेगा। सेंट स्टीफंस और जीसस एंड मेरी कॉलेज डीयू के सेंट्रलाइज्ड फॉर्म को स्वीकार नहीं करते हैं। इन कॉलेजों के फॉर्म के लिए अलग से अप्लाई करना होता है।
डीयू में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज में एडमिशन का दौर शुरू हो गया है। एंट्रेंस टेस्ट का शेड्यूल भी फाइनल कर दिया गया है। यूनिवसिर्टी के मुताबिक, स्टूडेंट्स कोसेर्ज के बारे में संबंधित फैकल्टी से जानकारी ले सकते हैं और एडमिशन का प्रोसेस भी जान सकते हैं। इसके अलावा डीयू की वेबसाइट www.du.ac.in पर भी जानकारी मुहैया कराई जा रही है। एमएससी कोसेर्ज में एडमिशन मेरिट और एंट्रेंस टेस्ट दोनों तरह से होते हैं। डिपार्टमेंट में 50 पर्सेंट सीटों पर डीयू से बीएससी ऑनर्स करने वाले स्टूडेंट्स का एडमिशन मेरिट के बेस पर होता है, जबकि 50 पर्सेंट सीटें एंट्रेंस टेस्ट के जरिए भरी जाती हैं। इस बार पीजी लेवल पर भी सीटों में इजाफा हो रहा है। फैकल्टी ऑफ साइंस ने पीजी कोसेर्ज का एडमिशन शेड्यूल जारी कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, एमएससी केमिस्ट्री का एंट्रेंस टेस्ट 1 जून, फिजिक्स का 2 जून, जूलॉजी का 3 जून, बोटनी 4 जून, बायो मेडिकल साइंस और एनवायरनमेंटल बायोलजी का 5 जून, जियोलजी का 7 जून, एंथ्रोपॉलजी का 8 जून को होगा। बोटनी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर वेद पाल सिंह का कहना है कि उनके डिपार्टमेंट में सीटों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है। वह कहते हैं कि 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स एंट्रेंस टेस्ट के लिए अप्लाई करते हैं।
डीयू हेल्पलाइन शुरू
तीन आईटी कंपनियों में 20000 नौकरियां कारोबारी माहौल में सुधार के चलते आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो ने जनवरी-मार्च तिमाही में 20,000 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की। मानव संसाधन विशेषज्ञों के मुताबिक, आईटी और आईटी से जुड़ी सेवाओं में इस साल बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने की संभावना है और कई प्रमुख कंपनियों ने इस दिशा में काम करना शुरू भी कर दिया है। जनवरी-मार्च तिमाही में इन तीन आईटी कंपनियों ने कुल 20,014 कर्मचारियों की नियुक्ति की। हालांकि इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इन प्रतिष्ठित कंपनियों को अलविदा भी कहा। समीक्षाधीन तिमाही में इंफोसिस ने 9,313 कर्मचारियों की नियुक्ति की, लेकिन अगर कंपनी छोडऩे वाले कर्मचारियों की संख्या देखें तो कंपनी ने विशुद्ध रूप से 3,914 कर्मचारियों की नियुक्ति की जिससे उसके कुल कर्मचारियों की संख्या 1,13,796 पहुंच गई। इसी तरह, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज [टीसीएस] ने विशुद्ध रूप से 10,775 कर्मचारियों की नियुक्ति चौथी तिमाही में की जिससे उसके कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 1,60,429 पहुंच गई। इसके अलावा, विप्रो ने बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में विशुद्ध रूप से 5,325 कर्मचारियों की नियुक्ति की जिससे उसके कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर 1,08,071 पहुंच गई।
महंगा हुआ डॉक्टर, इंजीनियर बनना महंगाई की मार से त्रस्त जनता पर एक और बोझ बढ़ गया है। अगले सत्र से उत्तर प्रदेश में मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन महंगी हो जाएगी। राज्य सरकार ने अगले सेशन के लिए फीस स्ट्रक्चर में बढ़ोतरी की घोषणा सरीन कमिटी की सिफारिशों के आधार पर की। छत्रपति साहू जी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी (सीएसएमएमयू) की इग्जेक्युटिव काउंसिल ने मंगलवार को हुई मीटिंग में इस आशय का फैसला किया। कार्यकारिणी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अगले सेशन से अंडर और पोस्ट ग्रेजुएट कोसेर्ज की फीस में बढ़ोतरी हो जाएगी। अगला सेशन जुलाई से शुरू होगा। एमबीबीएस कोर्स के लिए पहले हर साल 18,300 रुपये फीस लगती थी, अब हर साल प्रत्येक छात्र के अभिभावक को 22,000 रुपये सालाना फीस देनी पड़ेगी। इसी तरह अब पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए हर साल 44,000 रुपये फीस देनी पड़ेगी।
20 नए आईआईआईटी खुलेंगे आईआईआईटी में पढ़ाई का सपना संजोए स्टूडेंट्स के लिए अच्छी खबर है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी माडल के 20 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकीसंस्थान (आईआईआईटी) स्थापित करने की योजना तैयार की है, जिसके तहत इनपर आने वाले खर्च का अनुपात सरकार तथा उद्योग के बीच 85 और 15 होगा। इन परियोजनाओं के लिए मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए नोट के अनुसार प्रत्येक आईआईआईटी की स्थापना 200 करोड़ रुपये के निवेश से की जाएगी और सरकार खर्चे का 85 फीसदी हिस्सा वहन करेगी। इस 85 प्रतिशत में से केंद्र 50 फीसदी और राज्य सरकार 35 फीसदी व्यय वहन करेगी। इसका मतलब यह हुआ कि प्रत्येक आईआईआईटी के निर्माण के लिए केंद्र 100 करोड़, राज्य सरकार 70 करोड़ और उद्योग 30 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने केंद्र, राज्य और उद्योग के बीच 50-35-15 की निधि साझेदारी व्यवस्था की है। योजना आयोग सैद्धांतिक तौर पर इसे मंजूरी दे चुका है। अब व्यय वित्त समिति इस पर विचार करेगी। मंत्रालय नैसकाम के उस प्रस्ताव को नामंजूर कर चुका है, जिसने इस सुझाव वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की थी कि निजी क्षेत्र को खर्च का 50 फीसदी से अधिक वहन करना चाहिए। योजना आयोग ने नैसकाम के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। अब यदि व्यय वित्त समिति सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है तो यह अंतिम स्वीकृति के लिए मंत्रिमंडल को भेजा जाएगा। योजना के अनुसार प्रत्येक आईआईआईटी विशिष्ट क्षेत्रों में श्रेष्ठता और विशेषज्ञता का केंद्र होगा।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) इस जुलाई से लंदन में अपने केंद्र खोलने जा रहा है। इन केंद्रों में स्नातक और परास्नातक प्रोग्राम ऑफर किए जाएंगे। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक लंदन के अलावा इग्नू अपने केंद्र को पेरिस में भी खोलने के बारे में विचार कर रहा है। इग्नू के कुलपति वी.राजशेखरन पिल्लई ने बताया कि इग्नू का मकसद है कि शिक्षा का प्रसार हर कोने में हो।
इग्नू के कुलपति वी.एन.राजशेखर पिल्लई ने कहा कि लंदन के अलावा हम केंद्रों को पेरिस और वियना में खोलने जा रहा है। उन्होंने बताया कि हम लंदन में मैनेजमेंट, आईटी, कंप्यूटर साइंस, इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, न्यू मीडिया स्टडीज और मीडिया मैनेजमेंट जैसे कोर्स पर पहला फोकस है। आने वाले समय में अन्य कोर्स पर भी काम किया जाएगा। वहीं पेरिस में फ्रेंच भाषा के कोर्स के साथ आम भारतीयों के लिए मुफीद कोर्स पर भी काम किया जा रहा है।
जबकि वियना में मुख्यत: जर्मन लैंग्वेज टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स ऑफर किया जाएगा। इसके अलावा लंदन के छात्रों के अंदर पर पाठ्यक्रम को बनाए जाने की तैयारी चल रही है। यूके यूनिवर्सिटी से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने के बावत पूछे जाने पर पिल्लई ने कहा कि हालांकि वहां पर खुद को साबित कर पाना आसान नहीं होगा लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि यह एक बड़ी चुनौती है।
लाइफ साइंस में बीएससी के साथ-साथ यहां फिजिक्स, केमेस्ट्री, बोटनी, जूलोजी, बायोलॉजिकल साइंस, बायो केमिस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैथेमेटिक्स और स्टेटिस्टिक्स में बीएससी ऑनर्स की भी व्यवस्था है। इस वर्ष अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में प्रथम वर्ष में1085 सीटों पर छात्र-छात्रओं को प्रवेश दिया जाएगा, जिसके साथ ओबीसी आरक्षण भी पूरा हो जाएगा। इस साथ ही अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में सीटों की संख्या लगभग 2875 हो जाएंगी और स्नातकोत्तर व वोकेशनल कोर्स को मिलाकर कॉलेज में कुल 33 सौ से अधिक छात्र-छात्रएं हो जाएंगे।
अगर आप एजुकेशन के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। आप जिस कोर्स के लिए लोन लेने जा रहे हैं सरकार उसके पूरा होने तक ब्याज का भुगतान करने की योजना बना रही है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सीनियर बैंकर ने बताया, 'कोर्स की शुरुआत से लेकर इसके पूरा होने तक मॉराटोरियम अवधि होती है और इस दौरान छात्र को ब्याज नहीं देना होगा। सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इससे छात्रों की ईएमआई में काफी कमी आएगी।' ब्याज दर की प्रस्तावित सब्सिडी से जुड़ी इस योजना से बैंकों को भी फायदा होगा। बैंक एजुकेशन लोन के डिफॉल्ट और भुगतान न मिलने को लेकर शिकायतें करते रहे हैं। ऐसा अनुमान है कि इस कर्ज में डिफॉल्ट की संख्या लगभग 2-3 फीसदी है। अभी तक सरकारी बैंकों ने 16,98,601 छात्रों को 32,000 करोड़ रुपये के एजुकेशन लोन दिए हैं।
सूत्रों का कहना है कि इससे सरकारी खजाने पर प्रतिवर्ष 500-1,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। सरकार इसके लिए लोन की सीमा 10 लाख रुपये तक तय करने पर भी विचार कर रही है। सरकार ने इस स्कीम के लिए केनरा बैंक को नोडल बैंक नियुक्त किया है। छात्रों को एजुकेशल लोन उपलब्ध कराने वाले सभी सरकारी बैंकों को सब्सिडी की रकम के लिए केनरा बैंक के पास क्लेम करना होगा। इस समय कर्नाटक ओर महाराष्ट्र जैसे राज्य एजुकेशन लोन के ब्याज पर सब्सिडी दे रहे हैं। बैंकों ने केंद्र सरकार से कम से कम चार लाख रुपये से कम के एजुकेशन लोन की गारंटी देने को भी कहा है। चार लाख रुपये से कम के लोन के लिए छात्रों को कोई सिक्योरिटी या गारंटी नहीं देनी होती। सरकार ने सरकारी बैंकों को बिना किसी ठोस कारण के एजुकेशन लोन अस्वीकार न करने का निर्देश दिया।
प्रतिस्पर्धा ने छीन ली पेशेवरों की नींद एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ ने कई पेशेवरों की रातों की नींद छीन ली है, वहीं एक चौथाई एक्जीक्यूटिव तो छह घंटे भी नहीं सो पाते। इस भागदौड़ में बड़ी संख्या में पेशेवर तनाव, थकान व मधुमेह जैसी बीमारियों का आसान शिकार बन रहे हैं। व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा वाली भाग दौड़ भरी आज की जिंदगी का यह सच उद्योग चैंबर एसोचैम की रिपोर्ट में सामने आया है। चैंबर ने उद्योग जगत के कर्मचारियों की सेहत से संबंधी यह रिपोर्ट बुधवार को जारी की है।
इसमें कहा गया है कि 24 फीसदी कारपोरेट कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके लिए 6 घंटे की नींद भी दुश्वार हो गई है। नींद पूरी नहीं होने से उन्हें दिन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनमें मानसिक तनाव, शारीरिक असंतुलन, परफार्मेस में गिरावट, काम में ध्यान न दे पाना जैसे कई नकारात्मक लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
एसोचैम महासचिव डीएस. रावत ने यह रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि कम नींद से न सिर्फ पेशेवरों की सेहत बिगड़ रही है, बल्कि उनकी उत्पादकता भी घट रही है। इससे तमाम कंपनियों को सालाना 150 अरब डालर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 21 प्रतिशत ने तनाव और दबाव के चलते थकान व कमजोरी महसूस होने की शिकायत की। इसके पीछे समय पर सो नहीं पाना और दिनचर्या बिगड़ना एक बड़ा कारण बताया गया है।
सर्वेक्षण में 17 प्रतिशत ने लगातार सिरदर्द की शिकायत बताई, जबकि 13 फीसदी ने कहा कि दिनचर्या बिगड़ने से उनका व्यवहार रूखा और अवसाद भरा रहता है। जहां तक शारीरिक फिटनेस की बात है, तो सर्वे में शामिल 30 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे बमुश्किल ही कोई व्यायाम कर पाते हैं। 25 फीसदी हफ्ते में मुश्किल से एक घंटा और 24 फीसदी एक से तीन घंटे का समय व्यायाम के लिए निकाल पाते हैं। सप्ताह में 6 घंटे से ज्यादा एक्सरसाइज करने वाले कर्मियों की तादाद महज 5 फीसदी रही। ऐसे कर्मचारी ही शारीरिक तौर पर फिट रह पाते हैं।
सर्वे में शामिल पेशेवर कर्मचारियों में 16 फीसदी मोटापे के शिकार मिले। मोटापा भी उत्पादकता पर असर डालता है। मानसिक तनाव से 11 फीसदी कर्मियों में दिल की बीमारी की शिकायत देखी गई। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियां, अस्थमा जैसी शिकायतें भी 2 से 10 फीसदी कर्मचारियों में मिलीं। बहाना बनाने में अमेरिकी आगे अक्सर नियोक्ता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनके कर्मचारी झूठे बहाने बनाकर छुट्टी लेते हैं। अब तो एक सर्वे में भी यह साबित हो गया है। यूएस जॉब पोर्टल करियर बिल्डर के सर्वे के मुताबिक, हर तीन में से एक अमेरिकी काम से छुट्टी लेने के लिए झूठे बहाने बनाता है। इस कारण कुछ को तो अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ता है। करीब एक तिहाई लोग (32 फीसदी) कम से कम एक बार स्वस्थ होने के बावजूद बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी लेते हैं। सर्वे में 4700 कर्मचारियों और 3100 नियोक्ताओं को शामिल किया गया था।
्AIM में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट भारत के जाने माने प्रबंधन संस्थान एशिया पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने वर्ष 2010 में अपने विद्यार्थियों को 100 प्रतिशत प्लेसमेंट दिलाने की घोषणा की है। कैम्पस प्लेसमेंट की प्रक्रिया में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की 92 कंपनियों ने हिस्सा लिया। 1996 में जिस साल संस्थान की स्थापना हुई थी तभी से एशिया पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने अपने विद्यार्थियों के लिए 100 प्रतिशत प्लेसमेंट की विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है।
आईआईएम-लखनऊ के सभी छात्रों को मिला प्लेसमेंट बिजनेस स्कूलों के छात्रों पर अब मंदी की मार का असर कम होता दिखाई दे रहा है। भारतीय प्रबंधन संस्थान-लखनऊ (आईआईएम-एल) ने इस साल सौ प्रतिशत प्लेसमेंट का आंकड़ा हासिल कर लिया है। आईआईएम-एल ने हालांकि छात्रों के पैकेज के बारे में जानकारी नहीं दी है।
इनमें सेंट्रम, माइक्रोलैंड, फाइजर, सीमंस इन्फार्मेशन सिस्टम्स, सुजलान, एससी जानसन और थामस कुक शामिल हैं। प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों ने आईआईएम-एल से छात्रों की नियुक्ति में खासी रुचि दिखाई है। इनमें ओएनजीसी, पावरग्रिड, एनटीपीसी और शिपिंग कार्पोरेशन शामिल हैं। इन कंपनियों ने वित्त, एचआर और सामान्य प्रबंधन में छात्रों को नौकरियों की पेशकश की है।
ललित होटल्स समूह नौकरियों की बहार
मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा करें 8 साल में: इग्नू इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) के पुराने स्टूडेंट्स को अपना मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा करने के लिए 8 साल का वक्त ही मिलेगा। यूनिवर्सिटी ने करीब 3.81 लाख स्टूडेंट्स को अपनी डिग्री व डिप्लोमा पूरा करने के लिए दिसंबर 2010 तक का समय दिया है। ये स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जिन्होंने आठ साल या इससे भी पहले से एडमिशन लिया हुआ है और अभी तक अपनी डिग्री पूरी नहीं की है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के स्टूडेंट्स को मार्च में एक बार फिर प्लेसमेंट का मौका मिल रहा है। दिसंबर, जनवरी के बाद अब 8 मार्च से प्लेसमेंट का तीसरा राउंड शुरू हो रहा है। इस राउंड में 6 कंपनियों का आना तो तय हो गया है, जबकि कुछ और कंपनियों की डेट्स भी फिक्स हो सकती हैं। थर्ड राउंड 8 से 10 मार्च तक चलेगा। इस राउंड में विकलांग स्टूडेंट्स के लिए भी अलग से प्लेसमेंट ड्राइव होगी। सेंट्रल प्लेसमेंट सेल (सीपीसी) के सेकेंड राउंड में 400 से अधिक स्टूडेंट्स को ऑफर लेटर मिल चुके हैं।
ऑटो सेक्टर में नौकरियों की बहार तेजी से तरक्की कर रही ऑटो इंडस्ट्री ने नौकरियों के दरवाजे खोल दिए हैं। देश की तीन बड़ी ऑटो कंपनियों ने करीब छह हज़ार नई नौकरियां देने का ऐलान किया है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति इस साल 950 लोगों को नौकरी देगी। कंपनी मानेसर में अपनी क्षमता में बढ़ोतरी करने के साथ एक नया रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर बना रही है। जो 2012 तक बनकर तैयार होगा। इसके लिए मारुति को बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की जरूरत है।
इस साल जून तक मारुति विदेशों से दस एक्सपर्ट भी भर्ती करेगी। मारुति के अलावा, जनरल मोटर्स भी भारत में अपने कर्मचारियों की क्षमता में बीस परसेंट की बढ़ोतरी करने जा रही है। कंपनी के हलोल और तालेगांव में प्रोडक्शन बढ़ाने के अलावा, रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए कंपनी अपनी बैंगलोर इकाई में इंजीनियरों की भर्ती भी करेगी। इस साल के आखिर तक कंपनी ने आठ सौ नए कर्मचारियों की भर्ती करने का ऐलान किया है।
साथ ही कई विदेशी कंपनियां भी भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू कर रही हैं। जिसके चलते नए कर्मचारियों की ज़रूरत भी बढ़ रही है। इंडस्ट्री के मानकों के मुताबिक एक कार की मैन्युफैक्चरिंग के लिए पांच कर्मचारियों की ज़रूरत होती है। जबकि एक कॉमर्शियल व्हीकल के उत्पादन में तेरह लोग लगते हैं। ऐसे में मौजूदा क्षमता और विस्तार योजनाओं के मुताबिक अगले डेढ़ से दो साल में ऑटो इंडस्ट्री को करीब दस लाख नए कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी।
ऑस्ट्रेलिया ने इमिग्रेशन कानून सख्त किया ऑस्ट्रेलिया ने अपने इमिग्रेशन कानून को सख्त बनाने का ऐलान किया। उसने कहा कि इससे हेयरड्रेसर और रसोइए जैस कम स्किल वाले लोगों की जगह डॉक्टर, नर्स और इंजीनियर जैसे ज्यादा स्किल वाले वर्करों को ऑस्ट्रेलिया आने में मदद मिलेगी। अनुमान है कि भारतीयों समेत करीब 20 हजार विदेशी छात्रों की माइग्रेशन अर्जियां इसके कारण खारिज हो जाएंगी।
इमिग्रेशन मिनिस्टर क्रिस इवंस ने कहा- इमिग्रेशन कानून में सुधार से ऑस्ट्रेलिया की स्थानीय मांग के अनुरूप ज्यादा डॉक्टरों, इंजीनियरों और आईटी प्रफेशनल्स को यहां आने में सहूलियत होगी। उन्होंने इस ट्रेंड की आलोचना की कि ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास के लिए लोग कुकरी, अकाउंटिंग और हेयरड्रेसिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला ले रहे हैं। इवंस ने माइग्रेशन ऑक्युपेशन इन डिमांड लिस्ट (एमओडीएल) को खत्म करने की घोषणा भी की।
इसका मकसद ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास के लिए योग्यता को सीमित करना है। उन्होंने कहा कि एमओडीएल से विदेशी छात्रों में आसानी से कुछ कोर्सेज में दाखिला लेकर स्थानीय निवास चाहने की प्रवृत्ति बढ़ी। उन्होंने कहा कि अब तक वजूद में रहे माइग्रेशन सिस्टम से हायर स्किल वाले प्रफेशनल्स के मुकाबले कम स्किल वाले प्रफेशनल्स के इमिग्रेशन को बढ़ावा मिला। इवंस का कहना था कि हम डॉक्टरों और नर्सों की बजाय विदेशों से हेयरड्रेसरों को बुला रहे हैं।
इवंस ने कहा कि मौजूदा सिस्टम की कमियों के कारण कुक और हेयरड्रेसर जैसे कई पेशों में क्वालिफिकेशन हासिल कर परमानेंट रेजिडेंसी के लिए विदेशी छात्र सड़कों पर रहते हैं, जबकि केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स जैसे विषयों में डिग्री रखने वाले छात्रों को इससे परेशानी होती है। उधर, द एज अखबार ने खबर दी है कि इमिग्रेशन कानून में बदलाव के कारण हेयरड्रेसिंग और कुकरी जैसे कोर्सेज के जरिए ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास के चाहने वाले भारतीयों समेत 20 हजार विदेशी छात्र प्रभावित होंगे। गौरतलब है कि ऐसे कोर्सेज में बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलिया में दाखिले लिए हैं।
नए कानून से क्वालिफिकेशन रखने वाले या वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों के मुकाबले उन लोगों को मदद मिलेगी जिनके स्पॉन्सर हैं या जिनके पास जॉब ऑफर है। वैसे एजेंटों पर भी नकेल कसेगी जो विदेशी छात्रों को गुमराह करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में कोर्स करने से खुद-ब-खुद वहां परमानेंट रेजिडेंसी मिल जाती है। इवंस ने कहा- ऐसा न था और न ऐसा होगा। स्टूडेंट वीजा का मतलब सिर्फ पढ़ाई के लिए वीजा है।
एलएलबी में एडमिशन हुआ आसान दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ एंट्रेंस टेस्ट देने का प्लान बना रहे स्टूडेंट्स को इस बार एलएलबी की रेकॉर्ड बढ़ी सीटों का तोहफा मिलेगा। यहां की लॉ फैकल्टी के मुताबिक, एलएलबी में कम से कम 400 सीटों का इजाफा हो रहा है और सीटों की तादाद 2,500 के पार चली जाएगी। पिछली बार एलएलबी की 2,100 सीटों के लिए स्टूडेंट्स के बीच मुकाबला हुआ था।
डीयू लॉ फैकल्टी से एलएलबी करने के लिए पूरे देश के स्टूडेंट्स आते हैं और मुकाबला काफी टफ होता है। लेकिन सीटें बढऩे से स्टूडेंट्स को फायदा होगा और सीटें बढऩे का असर कट ऑफ पर भी पड़ सकता है। पिछले साल फरवरी में एडमिशन प्रोसेस शुरू हो गया था और मार्च में एंट्रेंस टेस्ट हुआ था, लेकिन इस बार लॉ फैकल्टी और एग्जामिनेशन ब्रांच के बीच एंट्रेंस टेस्ट की डेट को लेकर टेंशन चल रही है। वैसे इतना तय है कि इस बार एंट्रेंस टेस्ट मार्च में नहीं, बल्कि मई में होगा। सेशन 2010-11 के लिए यूनिवसिर्टी के कॉलेजों की सीटों में भी काफी बढ़ोतरी हो रही है और ग्रेजुएशन लेवल पर सीटों की संख्या 55,000 तक पहुंच रही है।
इग्नू स्टूडेंट्स को भी लाखों का पैकेज यूनिवर्सिटीज में इस साल प्लेसमेंट प्रोसेस बहुत जोर-शोर से चल रहा है। इग्नू में पहली बार डिप्लोमा होल्डर स्टूडेंट्स को लाखों का पैकेज मिला है। इग्नू से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड एनवायरनमेंट मैनेजमेंट कर रहे 45 स्टूडेंट्स में से 32 की प्लेसमेंट हो चुकी है। खास बात यह है कि 6 स्टूडेंट्स को तो काफी अच्छा यानी 5.5 लाख का पैकेज मिला है। इग्नू के मुताबिक, डिस्टेंस लर्निंग से डिप्लोमा करने वाले स्टूडेंट्स को यह बहुत अच्छा पैकेज मिला है।
अडल्ट एजुकेशन में पीजी डिप्लोमा इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी ने यूनेस्को और जेएनयू के साथ मिलकर अडल्ट एजुकेशन में पीजी डिप्लोमा कोर्स शुरू किया है। कोर्स की अवधि एक साल और फीस पांच हजार रुपये है। इसमें ऐडमिशन के लिए 30 अप्रैल तक अप्लाई किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इस कोर्स को करने वाले स्टूडेंट्स केंद्र सरकार, राज्य सरकार, यूनिवर्सिटी और एनजीओ के प्रोजेक्टों में काम कर सकते हैं। कंपनियों को तरक्की की उम्मीद दुनिया भर के शीर्ष अधिकारियों में से ज्यादातर इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि इस साल वे उन्नति करेंगे। एक सर्वेक्षण के अनुसार सिर्फ 18 प्रतिशत अधिकारी ही मानते हैं कि उनकी कंपनी ठीक तरह से काम नहीं कर सकेगी। विकासशील देशों के ज्यादातर कंपनियों के प्रमुख ने अच्छी उन्नति की आशा जताई है। लगभग एक साल तक खर्चों में कटौती के बाद लगभग 40 प्रतिशत कंपनियां फिर से नौकरी देने की शुरुआत करने जा रहे हैं लेकिन पश्चिमी देशों की कंपनियां बिना नई नौकरियों के उबरने की उम्मीद कर रहे हैं।
दावोस में शुरू हो रहे वल्र्ड इकॉनॉमिक फोरम के शुरू होने से पहले यह सर्वेक्षण अंतरराष्टरीय लेखा कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) ने करवाया है। पीडब्ल्यूसी के ग्लोबल चेयरमैन डेनिस नैली ने कहा कि हमारे मुख्य कार्यकारी अधिकारी एहतियात के साथ आशावादी हैं। हालांकि कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में सुधार एक समान नहीं होगी।
ज्यादातर पश्चिमी देशों की कंपनियां मानती हैं कि उनके यहां बाजार अभी भी वैश्विक आर्थिक मंदी के असर से जूझ रहे हैं, लेकिन विकासशील देशों की कंपनियों के पास आशावादी होने की वजहें हैं। उदाहरण के तौर पर भारत के 97 प्रतिशत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मानते हैं कि उनकी कंपनी वर्ष 2010 में तरक्की करेगी। दो तिहाई चीनी अधिकारी मानते हैं कि अर्थव्यवस्था से उबरने की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि पश्चिमी देशों में भी कई कंपनियों के अधिकारियों ने माना कि वे अपनी कंपनी की तरक्की को लेकर आश्वस्त हैं।
आईआईटी ग्रेजुएट्स के सालाना वेतन में 5 फीसदी की गिरावट प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के स्नातकों के सालाना औसत वेतन में पांच फीसद की कमी आई है, जबकि राष्टरीय तकनीकी संस्थान का वेतन छह फीसदी बढ़ा है।
आईडीसी-डाटाक्वेस्ट द्वारा 2009 में देश भर के 111 इंजीनियरिंग कॉलेजों के सर्वेक्षण में कहा गया कि आईआईटी का सालाना औसत वेतन 2009 में पांच फीसदी घटकर 5.88 लाख रुपया हो गया। सर्वेक्षण में हालांकि आईआईटी स्नातकों केसालाना वेतन में गिरावट की वजह वैश्विक मंदी बताई गई, लेकिन मजे की बात है कि एनआईटी के स्नातक का वेतन छह फीसद बढ़कर करीब 4.36 लाख रुपये हो गया।
सर्वेक्षण में कहा गया के स्नातकों के सालाना वेतन में गिरावट की दूसरी वजह यह है कि आईआईटी के कई विलक्षण विद्यार्थियों ने नौकरी की बजाय उच्च शिक्षा को अहमियत दी। सर्वेक्षण में कहा गया कि सबसे अधिक वेतन पाने वाला इंजीनियरिंग स्नातक नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी संस्थान का रहा जिसने श्लुम्बर्गर से 45 लाख रुपये प्राप्त किए। वैश्विक मंदी के कारण देश भर में इंजीनियरिंग स्नातकों का सालाना वेतन औसतन 3.5 लाख रुपये रहा।
आईटी में बूम के संकेत अब कई सेक्टर आर्थिक मंदी की साया से बाहर निकल आया है। इसमें आईटी सेक्टर भी शामिल है। भारत की कई प्र्रमुख आईटी कंपनियों ने नतीजे शानदार रहे हैं। यही वहज है कि आर्थिक मंदी से चिंतित इंजीनियरिंग क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छी खबर है। बड़ी-बड़ी कंपनियों ने इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को नौकरी की पेशकश शुरू कर दी है। सरदार पटेल, डी. जे संघवी, विवेकानंद और वीजेटीआई जैसे कॉलेजों में इंफोसिस, टीसीएस, एक्सचेंजर, आईबीएम, पटनी आदि मशहूर कंपनियों ने कैम्पस इंटरव्यू द्वारा फ्रेशर्स की भर्ती शुरू कर दी है।
जानकारों के अनुसार, इस साल इंफोसिस द्वारा 12 हजार और टीसीएस द्वारा करीब 8 हजार इंजीनियरिंग छात्रों को लिया जाने वाला है। विले पार्ले के डी.जे संघवी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंफोसिस ने पिछले सप्ताह 223 छात्रों को चुना। उन्हें सवा तीन लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया गया। किसी एक कॉलेज कैम्पस से चुने गए छात्रों में डी.जे. की संख्या अधिकतम है। अंधेरी के सरदार पटेल कॉलेज से इंफोसिस ने 102 छात्र लिए हैं। टीसीएस के संदर्भ में डीजे की संख्या 118 और पटेल की 50 है। टीसीएस का पैकेज तीन लाख 16 हजार रुपये है।
इन दो कॉलेजों से लिए गए छात्रों की संख्या जॉब मार्केट में आए बूम का संकेत है। सितंबर, 2008 में भी उसने हजारों छात्र लिए थे। पर अक्टूबर, 2008 में आई मंदी के कारण ज्यादातर कंपनियों ने छात्रों को या तो नौकरी दी नहीं या बहुत कम वेतन दिया। उसके बाद अब कैम्पस इंटरव्यू हुए हैं।
जानकारों के मुताबिक, कंपनियों के रुझान से संकेत मिलता है कि इस बार जॉब मार्केट का ग्राफ ऊपर है। पैकेज में भी वृद्धि कर दी गई है। डी.जे संघवी इंजीनियरिंग कॉलेज से कॉलेज में बारह से ज्यादा कंपनियों द्वारा कैम्पस इंटरव्यू किए जा रहे हैं। आलम यह है कि कॉलेज के लगभग हर पात्र छात्र के पास बड़ी कंपनी में नौकरी का ऑफर है। डाईरेक्ट आई, एमडॉक्स, जेपी मॉरगन जैसी कंपनिया छह से आठ लाख रुप;ह्य तक पैकेज ऑफर कर रही हैं।
वकालत शुरू करने से पहले गुजरना होगा एग्जाम से कानूनी सुधारों पर सरकार के एक प्रस्ताव को यदि अमलीजामा पहना दिया गया तो लॉ ग्रैजुएट्स (एलएलबी)को कोर्ट में वकालत शुरू करने से पहले एक जांच-परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। कैबिनेट की मंजूरी पा चुके कानूनी सुधारों पर कानून मंत्रालय के एक मसौदे के मुताबिक ऐक्ट, 1961 के मसले पर बार के आला सदस्यों से इस मकसद से परामर्श किया जा सकता है ताकि बार में प्रवेश से पहले जरूरी एंप्रेंटिसशिप को फिर से बहाल किया जा सके और संभवत वकीलों के लिए एक क्वॉलिफाइंग परीक्षा शुरू की जा सके। मंत्रालय ने कहा कि वकीलों से लिया जाने वाला इम्तिहान ठीक वैसा ही होगा जैसा सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के लिए तय किया गया है। इस बाबत कानून मंत्रालय के अधिकारी पहले ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया से परामर्श कर रहे हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि कानूनी शिक्षा के स्तर में भारी अंतर के मद्देनजर सदस्यों में पेशेवर काबिलियत को बढ़ावा देने के लिए एडिशनल कोर्स इनपुट को बढ़ावा दिया जाना है। पिछले साल कानूनी सुधारों पर राष्टरीय परिचर्चा के दौरान इस मुद्दे पर सरकार और उच्च न्यायपालिका के बीच गहन चर्चा की गयी थी।
रोजगार बाजार में सुधार के संकेत
देश के रोजगार बाजार में सुधार के साथ नौकरी छोडऩे वाले कर्मचारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषकर उड्डयन, सूचना प्रौद्योगिकी और बीपीओ क्षेत्रों की कंपनियों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। शोध कंपनी ग्लोबल हंट इंडिया के निदेशक सुनील गोयल ने कहा कि लोगों का नौकरी छोड़कर जाना उद्योग जगत में सुधार का अच्छा संकेत है। जैसे ही रोजगार बाजार में सुधार होगा, नौकरी छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि नौकरी छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों की सर्वाधिक संख्या बीपीओ के साथ सूचना प्रौद्योगिकी और उड्डयन जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। दरअसल 2009 नौकरी के लिहाज से सबसे खराब साल साबित हुआ है। छंटनी, पिंक स्लिप और कर्मचारियों की संख्या को सही आकार देने जैसे शब्द घरों में चर्चा का विषय बने। हालांकि, 2009 के अंत में भारत में कुछ सुधार देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार सरकार के प्रोत्साहन पैकेज से तीसरी तिमाही में पांच लाख नौकरियों का सृजन हुआ।
ग्लोबल स्टाफिंग सर्विसेज कंपनी मैनपावर के अनुसार इस साल भर्ती मंदी के पूर्व स्तर पर आ जाएगी। क्योंकि कंपनियों में नियुक्ति परिदृश्य में सुधार हुआ है। मैनपावर के अनुसार सेवा, नागरिक प्रशासन, शिक्षा, खनन और निर्माण, वित्त, बीमा, जमीन-जायदाद तथा थोक एवं खुदरा के क्षेत्र में नौकरी तलाशने वाले को इस साल राहत मिल सकती है।
वर्ष 2010 में इन क्षेत्रों में भर्तियों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। औद्योगिक वृद्धि के लिहाज से वर्ष 2010 बेहतर रहने की उम्मीद है। ऐसे में नौकरी छोड़कर जाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी स्वाभाविक है। हालांकि, यह 2007 के स्तर से कम होगी।
इंजीनियरिंग के साथ मैनेजमेंट का भी गढ़ बनेगा दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (डीसीई) के दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय बनने के बाद उसे इंजीनियरिंग के साथ मैनेजमेंट का भी गढ़ बनाने की कवायद शुरू हो गई। जिस प्रकार अभी तक यहां से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना गौरव की बात है अब ठीक उसी प्रकार यहां से मैनेजमेंट की पढ़ाई भी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (डीसीई) की प्रतिष्ठा से कम नहीं होगी। यही वजह है कि डीटीयू प्रशासन ने बीते सत्र में पहली बार यहां पर शुरू किए गए मैनेजमेंट की पढ़ाई में उपलब्ध कुल सीट संख्या में अगले सत्र 2010-11 में दोगुने का इजाफा कर दिया है। डीटीयू में मैनेजमेंट कोर्स में दाखिला प्रक्रिया की शुरुआत पांच जनवरी से की जाएगी और इस बार तीन शाखाओं में एमबीए करने के लिए सीट संख्या 60 की बजाए 120 की सीट संख्या होगी। दाखिला प्रक्रिया की शुरुआत 5 जनवरी से शुरू हो रही है और फार्म को छात्र मुक्त में इंटरनेट से डाउनलोड कर जमा कर सकते हैं।
विज्ञान शिक्षा के लिए इग्नू ने स्थापित की रमण पीठ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने विज्ञान शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रमण पीठ की स्थापना की है। इग्नू के कुलपति वी.एन राजशेखरन पिल्लई ने बताया कि विज्ञान शिक्षा और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस पीठ की स्थापना की गई है। इसके सभी स्तर पर डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र के नए पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके जरिए समाज के सभी क्षेत्रों से युवा प्रतिभाओं को सामने लाया जाएगा और देशभर से विद्वानों की मदद से सेमिनार के जरिए विज्ञान के विकास में योगदान दिया जाएगा। रमण पीठ का प्रमुख पी टी मनोहरन को नियुक्त किया गया है, जो वर्तमान में तकनीकी एवं विज्ञान विभाग के रमन्ना फैलो हैं और मद्रास के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के मानद प्रोफेसर हैं। 11 नए मेडिकल कालेजों की स्थापना के लिए केंद्र की मंजूरी केंद्र ने 2009 में देश के विभिन्न हिस्से में 11 मेडिकल कॉलेजों के अलावा, 10 डेंटल कॉलेज की स्थापना के लिए अनुमति दिए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने बताया कि 11 मेडिकल कॉलेजों और 10 डेंटल कॉलेजों के अलावा, पांच आयुर्वेद और एक यूनानी मेडिकल कॉलेज के लिए भी मंजूरी दी गई है। आजाद ने बताया कि 11 मेडिकल कॉलेजों कुल 1350 सीटें होंगी, वहीं डेंटल कॉलेजों में कुल 900 सीटें होगी। आयुर्वेद एवं यूनानी मेडिकल कालेज में 300 सीटें होंगी।
![]() भारत में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए फिक्की का अमेरिकी संस्थान के साथ करार भारत में शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए उद्योग संगठन फिक्की ने अमेरिकी के संस्थानों के साथ तीन करार किए हैं। फिक्की के मुताबिक, टेक्सास विश्वविद्यालय के आईसी 2 इंस्टिट्यूट के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसका उद्देश्य भविष्य की टेक्नोलॉजी तथा वाणिज्यिक कार्यक्रमों के लिए मजबूत संबंध बनाना है। बयान में कहा गया है कि न्यूयार्क विश्वविद्यालय का पालिटेक्निक इंस्टिट्यूट तथा इंस्टिट्यूट आफ इंटरनेशनल एजुकेशन अकादमिक कार्यक्रमों, विज्ञान से संबंधित आदान-प्रदान तथा आपसी अनुसंधान आदि के क्षेत्र में अतिरिक्त संभावनाओं की तलाश करेंगे। फिक्की ने कहा कि पॉलिटेक्निक इंस्टिट्यूट के साथ एमओयू का मकसद ऐसे कार्यक्रमों का विकास करना है, जिससे सरकार और उद्योग को फायदा हो सके तथा साथ ही शोध और कारोबार में उच्च शिक्षा भागीदारी को बढ़ाया जा सके। दोनों संस्थानों ने भारत की विश्वस्तर की शोध एवं विकास सुविधाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी-अपनी विशेषज्ञता को लाना है। फिक्की और इंस्टिट्यूट आफ इंटरनेशनल एजुकेशन के बीच करार का उद्देश्य छात्रों के आदान-प्रदान के कार्यक्रम को बढ़ाना है।
आधुनिक हिंदुत्व पर अमेरिका में कोर्स की शुरुआत अमेरिका के एक प्रमुख विश्वविद्यालय ने हिन्दुत्व पर पाठ्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसमें छात्र उपनिवेशवादी काल से वर्तमान समय तक हिन्दुत्व के उद्भव के बारे में अध्ययन करेंगे। इंडियाना के ग्रीनकैसल में स्थित निजी क्षेत्र के नेशनल लिबरल ऑट्र्स कालेज से संबद्ध डीपाऊ विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने 'आधुनिक हिन्दुत्वÓ विषय पर नए कोर्स को मंजूरी प्रदान कर दी है। वर्ष 1837 में स्थापित विश्वविद्यालय की अपनी व्यवस्थित धरोहर है, जिसे पहले इंडियाना एसबरी विश्वविद्यालय के पाम से जाना जाता था। यह नाम इपीस्कोपल चर्च के पहले अमेरिकी बिशप फ्रांसिस एसबरी के नाम पर रखा गया था। विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशिया की संस्कृति, समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था के ऐतिहासिक परिदृश्य में आधुनिक हिन्दुत्व की प्रकृति को समझने की कोशिश है। धार्मिक शिक्षा प्रमुख सीनियर मेलिसा जिमरमैन ने कहा कि वर्तमान धार्मिक अध्ययन की सूची में यह कोर्स शामिल किया जाना स्वाभाविक है।
शुरू होगा एनआईआईटी विश्वविद्यालय शैक्षणिक सेवाएं उपलब्ध कराने वाली एनआईआईटी ने इस सप्ताह अपने पहले विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेगी और उसकी योजना अगले पांच वर्षों में सालाना 5,000 विद्यार्थियों को दाखिला देने की है। एनआईआईटी के चेयरमैन राजेंदर पवार कहा कि हमारा पहला एनआईआईटी विश्वविद्यालय इस सप्ताह के अंत में राजस्थान के नीमराणा में खुलेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में 400 विद्यार्थी लिए जाएंगे और हमारी योजना अगले पांच वर्षों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की तादाद बढ़ाकर सालाना 5,000 करने की है। पवार ने कहा कि विश्वविद्यालय कुछ चुनिंदा संकायों के साथ शिक्षा की शुरुआत करेगा, जिसमें विज्ञान, शिक्षा एवं बायोटेक्नोलाजी शामिल हैं।
थ्रीजी मोबाइल शिक्षा सेवाओं के लिए इग्नू ने किया इरिक्सन से करार इग्नू के विद्यार्थी अब अपनी पाठ्यसामग्री डाउनलोड करने और मोबाइल के जरिए एसएमएस अलर्ट पाने की अपेक्षा रख सकते हैं। भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालय इग्नू ने टेलीकॉम क्षेत्र की कंपनी इरिक्सन के साथ एक करार किया, ताकि मुक्त तथा दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में थ्रीजी मोबाइल सेवाओं के जरिए सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। इग्नू के कुलपति वी. एन राजशेखरन पिल्लई ने कहा कि इग्नू का नई तकनीकों के प्रति खुला नजरिया है जिनका इस्तेमाल अधिकतम विद्यार्थियों तक पहुंच निर्मित करने के लिए हो सकता है। हमारा ध्यान विशेष तौर पर ग्रामीण विद्यार्थियों पर है जिनका पढ़ाई से जुड़ी समस्याएं दूर करने के लिए हमेशा अध्यापकों से आमने सामने संपर्क नहीं हो सकता। इस कार्यक्रम के तहत पूरे पूर्वोत्तर में नेटवर्क रखने वाली मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी इरिक्सन विद्यार्थियों की पाठ्यक्रम से जुड़े वेब पेज देखने और असाइनमेंट तथा वीडियो क्लिप जैसी सामग्री डाउनलोड करने में मदद करेगी।
डॉ. मनमोहन सिंह स्कॉलरशिप की घोषणा ब्रिटिश कांउसिल ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के सैंट जोन्स कॉलेज में पीएचडी अध्ययन के लिए 'डॉ. मनमोहन सिंह स्कॉलरशिप 2010Ó की घोषणा की है। ब्रिटिश काउंसिल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि स्कॉलरशिप से विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में पीएचडी के अध्ययन के लिए भारतीय छात्रों की मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान में यह स्कॉलरशिप 2007 में स्थापित की गई थी, जो सैंट जोन्स कॉलेज के स्नातक एवं मानद सदस्य हैं। इस साल 'एप्लीकेशंस इन एरोस्पेस इंजीनियरिंज्ज्तथा एनर्जी स्टडीजÓ मास रुचि के विषय होंगे।
इंडियन यूनिवर्सिटी बनी यूके की पहली पसंद ब्रिटेन के उच्च शिक्षा संस्थान भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ व्यापक पैमाने पर सहयोज्ज्की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह सहयोज्ज्न केवल पाठ्यक्रमों के संयुक्त शिक्षण के क्षेत्र में हो रहा है, बल्कि अनुसंधान, शिक्षण सामग्री के विकास और विद्यार्थी तथा शिक्षकों के आदान प्रदान में भी किया जा रहा है। विधि के क्षेत्र में पकड़ रखने वाले एवरशेड्स कंपनी द्वारा किए गए एक अनुसंधान के अनुसार, भारत और चीन ब्रिटेन के संभावित सहयोगियों की सूची में शीर्ष पर हैं। जहां एक ओर ब्रिटिश विश्वविद्यालय तेजी से बढ़ रहे वैश्विक उच्च शिक्षा बाजार में विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं भारत 'सबसे पसंदीदाÓ देशों की सूची में शीर्ष पर है, जहां 35 प्रतिशत विश्वविद्यालय देश को अपने लक्ष्य के तौर पर देखते हैं। इसके बाद चीन और अफ्रीका का स्थान है। एवरशेड्स की 'ब्रिटिश विश्वविद्यालयों की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षा रिपोर्टÓ में पाया गया है कि दो तिहाई से अधिक संस्थान अंतरराष्ट्रीय सहयोज्ज्के प्रयास में हैं।
अफगान छात्रा को ऑक्सफोर्ड स्कॉलरशिप हिंसाग्रस्त अफगानिस्तान की एक छात्रा को स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए पहली बार ऑक्सफोर्ड की वीडनफील्ड हाफमैन स्कॉलरशिप मिली है। वह विकास संबंधी अध्ययन में स्नातकोत्तर डिग्री की पढ़ाई कर रही हैं। गौरतलब है कि वीडनफील्ड स्कॉलरशिप वर्ष 2007 में शुरू हुई थी और उस समय 17 छात्रों को यह स्कॉलरशिप दी जाती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 29 कर दिया गया है। इस स्कॉलरशीप का उद्देश्य विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को ऑक्सफोर्ड में पढऩे का अवसर मुहैया कराना है।
मुंबई में खुलेंगे दर्जन भर नए कॉलेज मुंबई यूनिवर्सिटी की सिनेट ने मुंबई में 30, ठाणे में 38, रायगढ़ व रत्नगिरी में 19-19, सिंधुदुर्ग में 14 और नवी मुंबई में 12 कॉलेज बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यधारा की डिग्रियों के अलावा कानून, हॉस्पिटेलिटी और सोशल वर्क के कॉलेज भी बनाए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, सिनेट के 20 सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जबकि 18 सदस्य इसके विरोध में थे। इसके अलावा मुंबई यूनिवर्सिटी के भविष्य की योजना के तहत इस बात को भी मंजूरी दी गई कि यूनिवर्सिटी ऐसी डिग्रियां भी देगा, जो संयुक्त रूप से मुंबई यूनिवर्सिटी तथा देश-विदेश के किसी अन्य यूनिवर्सिटी द्वारा दी जाएंगी। सिनेट के एक सदस्य के अनुसार, नए कॉलेज गैर सहायता प्राप्त होंगे।
ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी में भारतीयों छात्रों को विशेष सुविधा भारतीय छात्रों को शिक्षा सुविधाओं समेत अन्य जरूरी जानकारी सही तौर पर देने के लिए मेलबर्न के एक विश्वविद्यालय ने विशेष सेवा की शुरुआत की है। स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के एक वक्तव्य में कहा गया है कि हालांकि छात्रों से संवाद के लिए फोन, एसएमएस और ऐसी ही कई सुविधाएं जारी हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने आस्क-ए-स्विनमेट नाम की एक नई सुविधा उपलब्ध कराई है। इस सुविधा से छात्रों और उनके अभिभावकों को कैंपस और वहां के जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी दी जाएगी। योजना की संयोजक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों और यहां के जीवन के बारे में जानने के लिए किसी समारोह में भाग लेना मुश्किल होता है। आस्क-ए-स्विनमेट कार्यक्रम छात्रों को यहां की स्थितियों में रह रहे छात्र से हर तरह की जानकारी लेने में मदद करेगा।
एआईईईई परीक्षार्थियों के लिए 2011 से हो सकता है ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प आल इंडिया इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (एआईईईई) में प्रवेश पाने के इच्छुक छात्रों के लिए 2011 से ऑनलाइन परीक्षा देने का विकल्प दिया जा सकता है। नेशनल स्कूल आफ टेक्नोलाजी और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन के लिए इस परीक्षा का संचालन सीबीएसई करती है। एनआईटी ने कागज कलम पर आधारित नियमित परीक्षा के साथ छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा देने का विकल्प उपलब्ध कराने की संभावना तलाशने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस समय एआईईईई परीक्षा में प्रति वर्ष 10 लाख छात्र बैठते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुसार इस समिति में इलाहाबाद, कालीकट और अगरतला के एनआईटी के निदेशक शामिल हैं और यह अगले वर्ष जनवरी में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
शिक्षा में सुधार के लिए आगे आईं राज्य सरकारें शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया तेज हो गई है। अब केंद्र के बाद राज्य सरकारों ने भी शिक्षा में सुधार के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, सिक्किम आदि राज्यों ने एनसीईआरटी से सहयोग मांगा है। बिहार ने अगले शैक्षणिक सत्र से 11वीं और 12वीं कक्षा में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने का फैसला किया है। बिहार के शिक्षा विभाग ने इस संबंध में राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किया है। इससे राज्यों को अपनी शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय पाठ्यक्रम 2005 के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र ने भी एसएससी बोर्ड के पाठ्यक्रम को सीबीएसई की तर्ज पर लागू करने की बात कही है। महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने 2011-12 से विज्ञान एवं गणित विषय में सीबीएसई पाठ्यक्रम अपनाने की योजना बनाई है। तमिलनाडु ने भी कक्षा एक से छह तक 'समाचीर काल्वीÓ (समान शिक्षा प्रणाली) अपनाने का फैसला किया है। हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, गोवा, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, केरल, पंजाब, छत्तीसगढ़, मिजोरम, नगालैंड, मिजोरम, हरियाणा समेत 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने बोर्ड पाठ्यक्रमों को एनसीईआरटी के अनुरूप ढालने की पहल की है। एनसीईआरटी ने इसके तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को 10-10 लाख रुपये की वित्तीय मदद प्रदान की थी।
भारत में 2,000 नई नौकरियां देगी टोयोटा भारत में 2011 तक छोटी कार उतारने की तैयारी कर रही दुनिया की सबसे बड़ी कार कंपनी टोयोटा मोटर कारपोरेशन (टीएमसी) ने कहा कि वह भारत में 2,000 नियुक्तियां करेगी। भारत में टीएमसी का किर्लोस्कर समूह के साथ संयुक्त उपक्रम है, जिसे टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के नाम से जाना जाता है। कंपनी बेंगलूर में छोटी कार के विनिर्माण के लिए 3,200 करोड़ रुपये के निवेश से दूसरा संयंत्र लगाने जा रही है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के प्रबंध निदेशक हिरोशी नाकागावा ने कहा कि भारत में छोटी कार पेश करने के लिए हमें काफी लोगों की जरूरत है। हमारे निर्माणाधीन दूसरे संयंत्र में 2,000 अतिरिक्त नियुक्तियां की जाएंगी। इग्नू छह राज्यों में बीपीएल युवकों के लिए शिक्षण और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करेगी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानी इग्नू अगले साल की शुरूआत से छह राज्यों के आदिवासी इलाकों में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के युवकों के लिए प्रशिक्षण एवं शिक्षण के कई पाठ्यक्रम शुरू करेगी। सर्टिफिकेट या डिप्लोमा पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक करने वाले छात्रों को नौकरी दी जाएगी। इनमें अधिकांश सूचना प्रौद्योगिकी के छात्र होंगे। सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम की अवधि छह महीने की होगी, जबकि डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक साल का होगा। यह कार्यक्रम छह राज्यों- उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में से प्रत्येक की पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के द्वारा आयोजित किए जाएंगे।
ब्राउन विश्वविद्यालय में ईयर ऑफ इंडिया कार्यक्रम शुरू किया ब्राउन विश्वविद्यालय ने भारत की समृद्ध संस्कृति, राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय पटल पर इसके उदय को प्रकाश में लाने के लिए ईयर ऑफ इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। यहां के ब्राउन, एमआईटी और हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से एक साल तक चलने वाला एक सेमिनार आयोजित किया है, जिसके तहत दक्षिण एशियाई राजनीति के आयामों पर चर्चा की जाएगी। इनमें देश की न्याय व्यवस्था, महिला और एचआईवी, विदेश नीति, हिंदी फिल्में और आतंकवाद का मुकाबला सरीखे विषय शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने पश्चिम बंगाल के नया गांव के कलाकार दुखुश्याम चित्रकार के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र 'सांग्स ऑफ सारोफुल मैनÓ का वल्र्ड प्रीमियर कर इस कार्यक्रम की शुरूआत की। आगामी अकादमिक सत्र भारतीय संस्कृति, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर विभिन्न तरह के कार्यक्रम से पूर्ण होंगे। इसमें भाषण, कला प्रदर्शनी, फिल्म, अकादमिक सम्मेलन और भारतीय क्षेत्रों का दौरा भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत के उदय को मान्यता देते हुए हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड सरीखे अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने हाल ही में भारत को एक बेहतर तरीके से समझने के लिए पहल शुरू की है। ब्राउन में चेयर ऑफ इंडिया कार्यक्रम के आशुतोष वाष्र्णेय ने बताया कि आईवी लीग स्कूल्स अपने छात्रों को नई वैश्विक हकीकतों के लिए तैयार करना चाहता है।
दस हजार नए आईटीआई खोलने की तैयारी देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के मकसद से केंद्र सरकार देश में दस हजार नए आईटीआई खोलने की योजना बना रही है। यह घोषणा केंद्रीय योजना राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने की। उन्होंने कहा कि हमने शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी शैक्षिक संस्थाओं के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। हमारा जोर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा शैक्षिक संस्थाएं खोलकर शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाना है। केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि देश के प्रत्येक पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों में एक एक ग्रामीण विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा सार्वजनिक एवं निजी सहयोग से 25 हजार स्कूल भी बनाए जाने की पहल की जा रही है। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना के अलावा ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक जोर दिया जाएगा, जिससे गा्रमीण जनता बेहतर महसूस कर सके। इन प्रयासों से हम विस्थापन पर भी लगाम लगा सकते हैं।
शीर्ष 100 रैंकिंग में कोई भारतीय यूनिवर्सिटी नहीं विश्व की 100 शीर्ष रैंकिंग सूची में भारत का कोई भी यूनिवर्सिटी अपना स्थान दर्ज कराने में विफल रहा है, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन का दबदबा इस सूची में अभी-भी पूरी तरह से कायम है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका का हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी वर्ष 2009 की तरह शीर्ष पर है, जबकि ब्रिटेन एक पायदान आगे होकर तीसरे स्थान से दूसरे पर आ गया है। अमेरिका का येल यूनिवर्सिटी तीसरे स्थान पर आ गया है। टाइम्स हायर एजुकेशन की वरीयता सूची के मुताबिक यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ लंदन ने एक पायदान छलांग लगाकर चौथा स्थान बना लिया है। इंपीरियल कॉलेज लंदन और आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। शीर्ष 100 में स्थान पक्का करने वाले एशियाई यूनिवर्सिटी की संख्या 16 हो गई है। सूची में 22वां स्थान बनाकर तोक्यो यूनिवर्सिटी एशिया का सर्वोच्च विश्वविद्यालय बन गया है और हांगकांग विश्वविद्यालय से दो पायदान ऊपर है।
कैंब्रिज प्रयोगशाला से निकलते हैं नोबल विजेता कैंब्रिज की प्रयोगशाला को आप नोबल पुरस्कार विजेताओं की उत्पादनशाला कह सकते हैं। इस प्रयोगशाला में शोध करने के बाद नोबल पुरस्कार पाने वाले भारतीय वैज्ञानिक वेंकटरमन रामकृष्णन से पहले, इस प्रयोगशाला से निकले 13 वैज्ञानिकों को नोबल पुरस्कार मिल चुका है। एमआरसी लेबोरेटरी ऑफ मॉलिक्युलर बायोलॉजी से निकले रामकृष्णन इस प्रयोगशाला में शोध करने के बाद नोबल पुरस्कार पाने वाले 14वें वैज्ञानिक हैं। इसके पहले प्रयोगशाला के जिन वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार मिला चुका है वे हैं- फ्रेड सेंगर (1958), मैक्स पर्युट्ज (1962), जॉन कैंड्रयू (1962), फ्रांसिस क्रिक (1962), जिम वॉटसन (1962), फ्रेड सेंगर (1980), आरोन क्लग (1982), जॉर्ज कोहलर (1984), सीजर माइलस्टीन (1984), जॉन वॉकर (1997), सिडनी ब्रेनर (2002), जॉन सल्सटन (2002) और रोबर होर्विट्ज (2002)।
सीबीएई परीक्षाओं में मिलेंगे पांच मौके सेेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएई) यह घोषणा की है कि एक विषय में कंपार्टमेंट या फेल होने की परंपरा को इसी अकादमी सत्र से खत्म कर दिया जाएगा। परीक्षा प्रणाली में अपने सुधार कार्यक्रम, जिसमें नाइन प्वाइंट्स ग्रेडिंग सिस्टम भी लागू होना है, के तहत सीबीएई ने सभी सफल छात्रों को 'क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट्सÓ दिए जाने की भी व्यवस्था की है। वे प्रत्याशी जो सभी विषयों में (एडीशनल विषय को छोड़कर) क्वालिफाइंग ग्रेड (डी या इससे उपर) प्राप्त करेंगे, उन्हें क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट दिया जाएगा। वे छात्र जो किसी एक विषय में ग्रेड-ई-1 या ई-2 प्राप्त करेंगे, उन्हे पांच प्रयासों में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाना होगा। मिसाल के तौर पर एक प्रत्याशी मार्च 2010 की बोर्ड परीक्षाओं में बैठता है और उसका किसी एक मुख्य विषय में ग्रेड ई-1 या ई-2 आता है (और अन्य सभी विषयों में क्वालिफाइंग ग्रेड डी या उससे उपर आता है) तो वह जुलाई 2010 से अगले पांच प्रयासों में कमजोर विषय में अपने प्रदर्शन को बेहतर कर सकता है। केवल वही छात्र उच्च कक्षाओं में प्रवेश पायेंगे, जिन्हें क्वालिफाइंग सर्टिफिकेट मिला है।
एनआईआईटी ने जीता पांच पुरस्कार भारत की एक प्रमुख आईटी कंपनी, एनआईआईटी ने चीन में पांच पुरस्कार जीते। इनमें से एक पुरस्कार चीन में सबसे प्रभावी आईटी ब्रांड का भी है। यह पुरस्कार एनआईआईटी के चीन में विश्वस्तरीय पेशेवर तैयार करने के प्रयासों के कारण दिया गया। पुरस्कार चीन के शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम कर रही चायनीज सोसायटी ऑफ एजुकेशन डेवलॅपमेंट स्ट्रेटजी (सीएसईडीएस)ïद्वारा दिए गए।
नैनो साइंस पर अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस नैनो साइंस और नैनो टेक्नोलॉजी पर अंसल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पर अंसल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉज (डीलएसटी), मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंड अर्थ साइंस और भारत सरकार का भी सहयोग मिलेगा। टेक्निकल सत्र के दौरान दुनिया के अनेक रिसर्च वर्क दिखाएंगे। यह कॉन्फ्रेंस इस क्षेत्र के अनेक पेशेवर लोगों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, कॉरपोरेट वल्र्ड, सरकारी निकायों के प्रासंगिक अधिकारी और युवा अनुसंधानकर्ता और स्कॉलर्स को एक मंच देगी। एआइटी के निदेशक प्रोफेसर एमपी सिंह ने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी के विकास, उससे जुड़े खतरों और अवसरों के बारे में लोगों को जागरूक करने की आज सख्त जरूरत है। यह कॉन्फ्रेंस कम वर्कशॉप उसी दिशा में किया गया एक प्रयास है।
एनआईटी वारंगल बनेगी यूनिवर्सिटी पिछले पचास सालों से इंजीनियरिंग स्कूल के रूप में कार्यरत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(एआईटी), वारंगल अब पूर्ण विश्वविद्यालय में बदलने वाला है। अब इसमें मेडिसिन, लॉ और ह्यूमेनिटीज तथा बिजनेस इकोनॉमिक्स में पोस्टग्रेजुएट डिग्री के लिए भी पढ़ाई होगी। संस्थान के निदेशक वाईवी राव ने कहा कि मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के अनुसार इस संस्थान का मकसद एक यूनिवर्सिटी में तब्दील होना था। उन्होंने बताया कि हम अपना मूल नाम (एनआईटी-वारंगल) नहीं बदलेंगे, लेकिन यह अब एकीकृत यूनिवसिर्टी होगी, जहां इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के अलावा मेडिकल और लीगल एजुकेशन की भी पढ़ाई होगी।
कैट पंजीकरण की तारीख बढ़ी हजारों छात्रों को राहत देते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने कॉमन एडमिशन टेस्ट के लिए ऑनलाइन ऐप्लिकेशन स्वीकार करने की अंतिम तिथि-11 अक्टूबर कर दी है। यह फैसला सितंबर में पडऩे वाली अनेक सरकारी छुट्टिïयों के चलते लिया गया। यह पहला मौका है जब आईआईएमÓस ने ऑनलाइन एप्लीकेशन आमंत्रित किए है और एग्जाम कंडक्ट करने वाली फर्म प्रोमेट्रिक के सूत्रों ने कहा कि पूरे देश में हजारों छात्र कैट की परीक्षा देते हैं। तारीख बढ़ाए जाने से वे लोग भी सीएटी-2009(कैट) क परीक्षा दे पाएंगे, जो छुट्टियों की वजह से आवेदन नहीं कर पाये थे। प्रोमोटिक के उपाध्यक्ष रमेश नावा ने कहा कि 9 सितंबर को रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद से अब तक 2,00,000 छात्र इसके लिए रजिस्टे्रशन करवा चुके हैं।
नई नियुक्तियों की तैयारी अर्थव्यवस्था में मजबूती के साथ-साथ नई नियुक्तियों की तैयारी भी होने लगी है। उद्योग जगत की नियुक्ति गतिविधियों में 15 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सब कुछ पूरी तरह से पटरी पर आ गया है। ग्लोबलहंट इंडिया के प्रोफेशनल लीडर सुनील गोयल कहते हैं कि हम विभिन्न क्षेत्रों में गतिविधियों को देख रहे हैं। इससे लगता है कि बुरा समय बीत चुका है। लेकिन हम वर्तमान परिदृश्य को सामान्य नहीं कह सकते। हम यह जरूर कह सकते हैं कि स्थिति खराब से बेहतर है। गोयल कहते हैं कि यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहता है, तो एक साल में स्थिति सामान्य हो जाएगी। पिछली दो तिमाहियों जनवरी-मार्च तथा अप्रैल-जून के दौरान विभिन्न उद्योगों में नियुक्ति की दर शून्य से पांच प्रतिशत के बीच रही। लेकिन वर्तमान तिमाही में यह दर 5 से 15 प्रतिशत के बीच है। दूरसंचार, बुनियादी ढांचा, लाइफ साइंस और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान पहली तिमाही की तुलना में नियुक्ति गतिविधियों में 25 से 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं, आईटी, खुदरा, बैंकिंग, कंसल्टींग और एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों में सितंबर की तिमाही में नियुक्तियों में इससे पिछली तिमाही की तुलना में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
पीएसयूज में नौकरियां गुजरात पीएसयूज उपक्रमों में रोजगार पैदा करने मामले में छठे स्थान पर है। राज्य स्तर के सरकारी उपक्रमों की दस राज्यों की सूची में रोजगार सृजन के मामले में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है, जबकि निवेश आकर्षित करने के मामले में आंध्र प्रदेश का स्थान चौथा है। एसएलपीई पर किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, इन उपक्रमों में निवेश और रोजगार हाथ में हाथ डालकर नहीं चलते। आंध्र प्रदेश में इस उपक्रमों में 31 मार्च, 2007 तक 2,65,081 लोगों को नौकरियां मिली थी। हालांकि इन इकाइयों में निवेश 32,993 करोड़ रुपये ही रहा है, जो गुजरात में 46,169 करोड़ रुपये के निवेश की तुलना में कम है। सर्वेक्षण के अनुसार, इसी तरह निवेश के मामले में तमिलनाडु का स्थान नौंवां है, लेकिन इन उपक्रमों में रोजगार देने के मामले में यह दूसरे स्थान पर है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2007 तक 837 एसएलपीई में 3,33,441 करोड़ रुपये के निवेश पर कुल 18 लाख लोगों को रोजगार मिला था।
छात्रों को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सिखाने के लिए नई पहल आमतौर पर विदेश से पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। इसी को देखते हुए ऑस्ट्रलिया में भारत सहित दूसरे देशों के छात्रों को धाराप्रवाह अंगेरजी एक नई पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत भारत सहित दूसरे देशों के छात्रों को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना सिखाने के लिए 'लैंग्वेज लैबोरेटरी' की स्थापना की जाएगी। माना जाता है कि धाराप्रवाह अंग्रेजी नहीं बोल पाने की वजह से यहां के समाज में उन्हें घुलने मिलने में परेशानी होती है। प्राइमस टेलीकॉम के सीईओ रवि भाटिया ने बताया कि 'हार्मनी ऑस्ट्रेलिया सेंटर' स्वयंसेवियों की निगरानी में विदेशी छात्रों को भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश करेंगे, जिसका उद्देश्य उनकी अंग्रेजी में सुधार करना है।कैट के लिए ऑनलाइन मॉक टेस्ट कैट परीक्षा 2009 को ध्यान में रखते हुए करियर संस्थान पीटी एजुकेशन की ओर से ऑनलाइन मॉक टेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। इस टेस्ट बारे में छात्रों की जिज्ञासा को देखते हुए देश के 85 से भी अधिक केंद्रों पर एक कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला में सीबीटी यानि कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट की जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला के बाद कैट की आगामी परीक्षा में बैठने वाले छात्र इस करियर संस्थान द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे मॉक टेस्ट दे सकते हैं। इस परीक्षा को पीटी एजुकेशन की कंप्यूटर लैब में प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर के जरिये दिया जाएगा। यह टेस्ट सेंटर के छात्रों के अलावा कैट परीक्षा 09 में शामिल होने वाला कोई भी छात्र दे सकता है। गौरतलब है कि पीटी एजुकेशन सेंटर कैट की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए 264 ऑनलाइन मॉक टेस्ट उपलब्ध करा रहा है।
मिशन इंडिया स्किलप्रसिद्घ शिक्षण संस्थान मणिपाल एजुकेशन और ब्रिटेन की मुल्यांकन एवं प्रशिक्षण संस्था सिटी एंड गिल्ड्स ने भारतीय स्किल्ड्स छात्रों को देश और विदेशों में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए आपस में हाथ मिलाया है। इस योजना को 'इंडिया स्किल्सÓ नाम दिया गया है। इंडिया स्किल्स के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सभी स्तरों पर किफायती प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही पांच वर्षों में 500 व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से दस लाख लोगों को प्रशिक्षण, मूल्यांकन एवं प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। यह प्रशिक्षण संस्थान केंद्र पूरे देश में अक्टूबर से खुलने शुरू होंगे। इसमें प्रवेश एंट्रेस टेस्ट की जगह एप्टीट्यूड टेस्ट के आधार पर होगा।
रैफल्स मिलेनिययम का नया कोर्सउच्च स्तरीय अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और कॉमर्स कोर्स कराने वाले एशिया पैसिफिक के प्रमुख डिजाइन कॉलेज-रैफल्स मिलेनियम इंटरनेशनल (आरएमआई) ने -फैशन मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत की है। तीन वर्षीय इस कोर्स को करने के बाद एडवांस डिप्लोमा और बैचलर डिग्री दी जाएगी। यह कोर्स नई दिल्ली और बैंगलुरू में शुरू होंगे। फैशन मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट में कलर थ्योरी फॉर फैशन, टेक्सटाइल्स, फैशन मर्केन्डाइजिंग, हिस्ट्री ऑफ कॉस्ट्यूम, टेक्सटाइल्स, फैशन मर्केन्डाइजिंग, फैशन मार्केटिंग, फैशन एंड कंज्यूमर, कंटेम्परेरी हिस्ट्री ऑफ फैशन, फैशन मार्केटिंग, फैशन एंड कंज्यूमर, प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स जैसी तमाम चीजें शामिल होंगी। इस मौके पर रैफलस मिलेनियम के निदेशक थॉमस यिप ने बताया कि युवा पीढ़ी के सामने फैशन के इस क्षेत्र में अपार संभावनाओं और अवसरों को ध्यान में रखते हुए कोर्स को शुरू किया गया है। फैशन मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट के एडवांस डिप्लोमा और डिग्री कोर्स में प्रवेश के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से बारहवीं पास होना जरूरी है। प्रतीक्षारत बारहवीं के छात्र भी प्रोविजनल एडमिशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। एडमिशन फॉर्म आरएमआई परिसर, 9बी, राजेंद्र पार्क, होटल जेपी सिद्घार्थ के सामने, पूसा रोड नई दिल्ली से प्राप्त कर सकते हैं। एडमिशन फॉर्म बेबसाइट www.raffles-millennium-international.com से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
इग्नू ने शुरू किया फूड सिक्योरिटी का नया कोर्स इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी(इग्नू) देश के उत्तर-पूर्व में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर और फूड सिक्योरिटी पर विशेष कोर्स शुरू करने जा रहा है। उत्तर-पूर्व के नौ राज्यों में देश का 7.7 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र है, लेकिन देश के कुल अनाज उत्पादन में इन राज्यों की भागीदारी लगभग 1.5 प्रतिशत ही है। इन राज्यों की 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर करती है, इसलिए इस क्षेत्रों में कृषि आधारित विशेष शिक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस कोर्स को शुरू किया गया है। उल्लेखनीय है कि इग्नू ने पिछले साल नवंबर में त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में नेशनल सेंटर फॉर ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग इन रिसर्च एंड टे्रनिंग इन एग्रीकल्चर(आईसीआरटीए) की स्थापना की थी। जिसका मकसद ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग के द्वारा कृषि और उससे जुड़े उद्यागों के लिए मानव संसाधन विकसित करना था। इग्नू के सूत्रों के अनुसार यहां शुरू होने वाले नये कोर्स अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में होंगे। इनमें मशरूम प्रोडक्शन एंड मार्केंटिंग, लाइव स्टॉक प्रोडक्शन एंड मैनेजमेंट, हॉर्टीकल्चर नर्सरी मैनेजमेंट, वैल्यू एडीशन इन फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स, हनी प्रोडक्शन एंड प्रोसेसिंग, बायो फर्टीलाइजर एंड बायो पेस्टिसाइड्स प्रोडक्टशन,पिग फार्मिंग एंड प्रोडक्शन, फिश मार्केंटिंग एंड मैनेजमेंट, प्रोडक्शन एंड मार्केटिंग ऑफ टरमरिक एंड ओरकिड्स आदि शामिल हैं। इस कोर्स के द्वारा अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए परांपरगत तरीकों के साथ-साथ ऑडियो-विडियो विजुअल का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
आईआईएमसी की चार नई शाखाएंइंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास क्मयुनिकेशन (आईआईएमसी) की चार नई शाखाएं खोली जाएंगी। ये शाखाएं एक -एक जम्मू-कश्मीर और मिजोरम में तथा एक-एक दक्षिणी और पश्चिमी भारत में होंगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने राजधानी में आईआईएमसी के 42वें कॉन्वोकेशन समारोह में यह बात कही। मंत्रालय इस इंस्टीट्यूट को विश्व स्तरीय मीडिया एजुकेशन, टे्रनिंग और रिसर्च यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित होने के बाद आईआईएमसी वर्तमान में दिए जाने वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा के अलावा डिग्री भी दे सकेगा। श्रीमति सोनी ने कहा कि आईआईएमसी अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के कोर्सेस शुरू कर सकेगा और एमफिल और पीएचडी की डिग्रियां दे सकेगा।
डब्ल्यूएलसी की विशेष छात्रवृत्तिडब्ल्यूएलसी कॉलेज इंडिया (डब्ल्यूएलसीआई) ने अपनी विशेष परियोजाना के जरिए रक्षा कर्मियों, उनकी पत्नियों, बच्चों, एवं भूतपूर्व सेवा कर्मियों को लाभ पहुंचाने के मकसद से विशेष छात्रवृत्ति की घोषणा की है। इन छात्रवृत्तियों को बिजनेस, इकोनॉमिक्स, फैशन टेक्नोलॉजी, एडवर्टाइजिंग एंड ग्राफिक डिजाइन, विजुअल कम्युनिकेशंस एवं मास कम्युनिकेशंस में प्रोफेशनल कोर्सेज के जरिये प्रस्तावित किया गया है। रक्षा कर्मियों एवं उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति को तीन विशिष्टï अनुभागों में श्रेणीबद्ध किया गया है। किसी भी रैंक के ऐसे सुरक्षाकर्मियों के बच्चों को 100 प्रतिशत छात्रवृत्ति दी जाएगी, जो किसी एक्शन के दौरान शहीद हो गए हैं। किसी भी रैंक के ऐसे सुरक्षाकर्मी, जिनकी सेवाकाल के दौरान मृत्यू हो गयी है, के बच्चों को 50 प्रतिशत की छात्रवृत्ति प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त सेना अधिकारी तथा सेना अधिकारियों के बच्चों को 25 प्रतिशत फ्रीशिप प्रदान की जाएगी। छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए आवेदक के पास स्नातक डिग्री या इसके समकक्ष डिग्री होनी चाहिए और एडवांस प्रोग्राम में छात्रवृत्ति के लिए 10+2 या समकक्ष होना चाहिए।
भारत में स्किल एम्प्लॉई की हो सकती है कमी-डेलायट स्किल्ड लोगों के लिए आज भी जॉब की कोई कमी नहीं है, इस बात को हालिया रिपोर्ट भी तसदीक करती है। ग्लोबल कंसल्टींग फर्म डेलायट कीहाल ही आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर काम करने के लिए आने वाले दिनों में स्किल्ड एम्प्लॉइज की कमी का सामना करना पड़ सकता है। डेलायट के मुताबिक, यदि कंपनी को ग्लोबर स्तर पर बेहतर करना है, तो उसे अपने मानव संसाधन के प्रबंधन में बदलाव लाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में प्रतिभाओं की कमी और बढ़ेगी, क्योंकि यूनिवर्सिटीज और अन्य इंस्टीट्यूट में लोगों को ऐसी शिक्षा नहीं मिल रही है, जिससे पर्याप्त संख्या में प्रबंधक तैयार हो सकें। इसमें कहा गया है कि अच्छे प्रबंधकों की कमी अभी से दिखने लगी है। डेलायट के मुताबिक, शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने के बाद ही स्थिति बेहतर हो सकती है। फर्म का कहना है कि यदि अभी से ध्यान दिया जाए, तो शिक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार होने में पांच से दस वर्ष का समय लग सकता है। वैसे, अमेरिका, यूरोप और जापान की आबादी में बूढ़ों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट की मानव संसाधन को ध्यान में रख कर चलना पड़ेगा।
जॉब की रफ्तार मारुति सुजुकी, ह्युंडई मोटर्स, होंडा सिएल कार्स इंडिया और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स जैसी शीर्ष कार कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के लिए अगले एक महीने के दौरान 5,000 लोगों की नियुक्तियां कर सकती हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां त्योहारों के सीजन सितंबर से अक्टूबर के बीच गाडिय़ों की भारी मांग आने की उम्मीद कर रही हैं। इसलिए कार कंपनियां अगले दो महीने के दौरान 50,000-70,000 अतिरिक्तकारें बनाने का लक्ष्य रख रही हैं, जबकि औसत मासिक उत्पादन 1.3 लाख गाडिय़ों के करीब है। मारुति आर ऐंड डी टीम में 215 अतिरिक्तइंजीनियरों की नियुक्तिभी करेगी। ह्युंडई मोटर इंडिया ने उत्पादन को मजबूती देने के लिए पहले से ही 1,000 कर्मचारियों की नियुक्ति कर ली है और वह सितंबर में भी भर्तियां करने की तैयारी कर रही है।
सबसे कम मेहनताना मुंबई में आप खूब पैसा कमाने की सोच रहे हैं, तो स्विट्जरलैंड की तरफ रुख करना चाहिए। हाल ही में एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पैसे के लिहाज से स्विट्जरलैंड में काम करना सबसे बेहतर है। यूबीएस की एक स्टडी के मुताबिक, ज्यूरिख और जिनीवा में काम करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है, जबकि मुंबई में काम करने के लिए दिया जाना वाला मेहनताना दुनिया में सबसे कम है। यूबीएस के मुताबिक, एम्प्लॉइज को दी जाने वाली सैलरी और मेहनताने के मामले में ज्यूरिख और जिनीवा दुनिया के बाकी शहरों के मुकाबले काफी आगे हैं। यह स्टडी हर 3 साल पर प्रकाशित की जाती है। इसमें पूरी दुनिया के 73 शहरों के एम्प्लॉइज की इनकम और परचेजिंग पावर की तुलना की जाती है।
स्माइल है कामयाबी का राज हाल ही में यूके के द डेली एक्सप्रेस में प्रकाशित एक सर्वे के मुताबिक, 25 फीसदी लोग मानते हैं कि जिन लोगों के चेहरे पर मुस्कान होती है, वे अपने कारोबारी जीवन में अधिक कामयाब होते हैं। इसके बाद गुड लुक, चार्म और हिडेन स्किल की बारी आती है। यह स्टडी ब्रिस्टॉन के 18 से 24 वर्ष के लोगों के बीच की गई। इसमें 40 फीसदी लोगों स्माइलिंग फेस वर्जिन बॉस रिचर्ड ब्रैनसन को सराहा। डॉर बिजनेस टाइकून एलन सुगर को 13 और सेफ जेमी ऑलिवर को 9 प्रतिशत लोगों ने उनके स्माइलिंग के लिए सराहा।
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